भिण्ड, 09 जनवरी। शासकीय महाविद्यालय आलमपुर में इतिहास विभाग द्वारा ‘भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका (मध्य भारत के विशेष संदर्भ में)’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन गूगल मीट के माध्यम से किया गया है। कार्यक्रम के दौरान महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. भगवान सिंह निरंजन ने स्वागत भाषण देने के उपरांत कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं का योगदान केवल अतीत नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्त्रोत है।
कार्यक्रम के संरक्षक डॉ. कुमार रत्नम (अतिरिक्त संचालक, उच्च शिक्षा ग्वालियर-चंबल संभाग ग्वालियर) ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका अत्यंत व्यापक एवं प्रेरणादायी रही है। उन्होंने बताया कि मध्य भारत की महिलाओं ने सामाजिक बंधनों को तोड़ते हुए क्रांतिकारी आंदोलनों, सत्याग्रह एवं जनजागरण में सक्रिय सहभागिता निभाई।
कार्यक्रम संरक्षक जनभागीदारी समिति अध्यक्ष कल्याण सिंह कौरव ने कहा कि ऐसे राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक आयोजनों से विद्यार्थियों में इतिहास के प्रति रुचि तथा राष्ट्रभक्ति की भावना का विकास होता है। वेबिनार में डॉ. मेघना शर्मा (एसोसिएट प्रोफेसर, महाराजा गंगा सिंह विश्वविद्यालय बीकानेर) ने अपने वक्तव्य में आर्य समाज की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि दयानंद सरस्वती ने महिला शिक्षा, सामाजिक सुधार एवं राष्ट्रीय चेतना के माध्यम से स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया।
डॉ. हंसा व्यास ने कहा कि मध्य भारत की महिलाओं ने न केवल आंदोलन में भाग लिया, बल्कि सामाजिक जागरूकता और संगठन निर्माण में भी महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। डॉ. संजय कुमार स्वर्णकार (प्रोफेसर, केआरजी पीजी कॉलेज ग्वालियर) ने अपने विचार रखते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में आंदोलन के समय पुरुषों के गिरफ्तार होने पर महिलाओं ने आंदोलन की बागडोर संभाली है उनका योगदान इतिहास की पुस्तकों से कहीं अधिक व्यापक है और उनके बलिदान को इतिहास में समुचित स्थान दिया जाना चाहिए।
डॉ. विनय श्रीवास्तव (एसोसिएट प्रोफेसर, शा. महर्षि अरविंद महाविद्यालय गोहद) ने कहा कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महारानी रानी लक्ष्मी बाई, रानी अवंती बाई लोधी जैसी अनेक वीरांगनाओं को नतमस्तक होकर हम याद करते हैं परंतु अनेक महिला स्वतंत्रता सेनानी ऐसी भी हैं जिनके बारे में ना तो हम जानते हैं और ना ही पुस्तकों में प्रकाशित किया गया है। मप्र के एकमात्र नीमच जिले से ही ऐसी आठ वीरंगनाओं (शांति बाई, जानकी बाई, कमला देवी यादव आदि) के नाम मिले हैं, जिन्होंने 1930 सविनय अवज्ञा आंदोलन में भागीदारी हेतु अजमेर के आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई थी। अत: विद्यार्थी शोध कार्य करते समय ऐसे विषय को ध्यान में रखें और महिलाओं के योगदान को भी हम समाज के सामने लाएं जिनको इतिहास अभी तक हमारे सामने नहीं लाया है। कार्यक्रम का संचालन इतिहास विभाग की डॉ. मंदाकिनी शर्मा ने एवं अंत में धर्मवीर सिंह भदौरिया ने आभार व्यक्त किया। वेबिनार में महाविद्यालय स्टाफ, शोधार्थी, देश के अनेक राज्यों से प्रतिभागियों ने आनलाइन सहभागिता की है।
Wednesday, August 5
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