भिण्ड, 10 दिसम्बर। मानवाधिकार दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शा. एमजेएस स्नातकोतर महाविद्यालय भिण्ड में प्राचार्य डॉ. आरए शर्मा के मार्गदर्शन में एवं स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ प्रभारी प्रो. मोहित कुमार दुबे के तत्वावधान में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता न्यायाधीश अनुभूति गुप्ता, जिला विधिक सहायता अधिकारी देवेश शर्मा, और पीएलवी मंजर अली उपस्थित रहे। सर्वप्रथम कार्यक्रम संयोजक डॉ. केके रायपुरिया ने अतिथियों का परिचय और सम्मान किया।
मुख्य वक्ता न्यायाधीश अनुभूति गुप्ता ने विद्यार्थियों को विधिक साक्षरता और जागरूकता एवं मानव अधिकार के बारे विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानवाधिकार वे अधिकार हैं जो हमें सिर्फ इसलिए प्राप्त हैं क्योंकि हम मनुष्य हैं, ये किसी राज्य द्वारा प्रदान नहीं किए जाते। ये सार्वभौमिक अधिकार हम सभी में निहित हैं, चाहे हमारी राष्ट्रीयता, लिंग, राष्ट्रीय या जातीय मूल, रंग, धर्म, भाषा या कोई अन्य स्थिति कुछ भी हो। मानव अधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देने के लिए अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर कई कानून और संस्थाएं मौजूद हैं। संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1948 में अपनाई गई मानव अधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा मानव अधिकार आंदोलन की एक मील का पत्थर है। आज के समय में भी दुनिया भर में मानव अधिकारों के हनन की घटनाएं होती रहती हैं, जिससे इन अधिकारों के बारे में जागरूकता और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता बनी हुई है। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रश्न कर उनको उत्तर समझाकर मानव अधिकार और विधिक साक्षरता से ज्ञानार्जित किया।
महाविद्यालय प्राचार्य डॉ. आरए शर्मा ने बताया कि मानवाधिकार मौलिक अधिकारों का एक समूह है, जो प्रत्येक व्यक्ति को प्राप्त है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम कौन हैं या हम कहां पैदा हुए हैं। हम सभी को समानता, गरिमा और सम्मान के साथ जीने का समान अधिकार है। देवेश शर्मा ने बताया कि मानव अधिकार हर व्यक्ति को दिए गए मूल अधिकार हैं। इन अधिकारों के प्रति कानून जितना जरूरी है, उतना ही आवश्यक है लोगों में इन अधिकारों के प्रति जागरूकता होना, क्योंकि हमारे समाज की सबसे बड़ी कमजोरी है जागरूकता की कमी। हम अपनी आवश्यकता की पूर्ति करने के लिए साधन तो तलाशते हैं, परंतु अपने अधिकारों को जानने की कोशिश कम ही करते हैं और समझौतों पर बल देते हैं।
प्रो. मोहित कुमार दुबे ने बताया मानव अधिकार जन्म मिले अधिकार होने के साथ साथ व्यक्ति को गरिमा, समानता और सम्मान के साथ जीने का अधिकार देते हैं, भेदभाव से बचाते हैं, मूलभूत ज़रूरतों जैसे भोजन, शिक्षा, स्वास्थ्य को पूरा करते हैं, और सरकारों को जवाबदेह बनाते हैं, जिससे एक न्यायपूर्ण और सुरक्षित समाज का निर्माण होता है, जहां व्यक्ति दुर्व्यवहार के खिलाफ आवाज उठा सकते हैं और स्वतंत्र रूप से सोच-विचार व अभिव्यक्ति कर सकते हैं। ये अधिकार हमें एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदार बनाते हैं और सबसे कमजोर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। साथ में विद्यार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों के साथ मानव अधिकारों पर प्रश्न मंच का आयोजन किया गया। इसमें क्या टीम में बनाकर विद्यार्थियों के साथ मानव अधिकार से संबंधित प्रश्न पूछे गए, इसमें टीम डी प्रथम और टीम ए द्वितीय स्थान पर रही। महाविद्यालय स्टाफ ने टीम डी के विद्यार्थियों सृष्टि यादव चांदनी आस्था कोरकू और साक्षी बाथम को बधाई दी। कार्यशाला का समापन राष्ट्रीय गान के साथ किया गया। इस अवसर पर समस्त महाविद्यालय स्टाफ उपस्थित रहा।
Saturday, June 20
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