– राकेश अचल
रूस के राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के सम्मान में शुक्रवार रात को राष्ट्रपति भवन में भव्य डिनर का आयोजन किया गया था। इस डिनर में शामिल होने के लिए कांग्रेस सांसद शशि थरूर को न्योता भेजा गया था, वह डिनर में शामिल भी हुए, लेकिन राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को कोई न्योता नहीं भेजा गया, अब कांग्रेस यदि इस पर हंगामा बरपाए भी तो क्या लाभ होगा?
पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति भवन में दिए गए डिनर में कांग्रेस सांसद शामिल हुए थे। सोशल मीडिया पर थरूर का एक वीडियो शेयर हो रहा है, जिसमें उन्हें राष्ट्रपति भवन में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के साथ बातचीत करते देखा जा सकता है। दोनों बातें करते हुए मुस्कुरा भी रहे हैं, लेकिन राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को डिनर के लिए न्योता नहीं भेजने पर कांग्रेस ने नाराजगी जाहिर की है। कांग्रेस की नाराजगी अस्वाभाविक है, कांग्रेस चाहे तो अपने सांसद शशि थरूर पर नाराज हो सकती है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने थरूर को पुतिन के सम्मान में आयोजित डिनर में आमंत्रित करने पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि यह बहुत आश्चर्यजनक है कि निमंत्रण भेजा गया और निमंत्रण स्वीकार भी कर लिया गया। हर व्यक्ति के अंतर्मन की एक आवाज होती है। जब मेरे नेता को आमंत्रित नहीं किया जाता, लेकिन मुझे बुलाया जाता है, तो हमें समझना चाहिए कि यह खेल क्या चल रहा है, यह खेल कौन खेल रहा है और हमें इस खेल का हिस्सा क्यों नहीं बनना चाहिए।
अब सवाल ये है कि क्या शशि थरूर राहुल गांधी को अपना नेता मानते हैं? मुझे तो लगता है कि शशि ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अपना नेता मान लिया है, इसीलिए वे उनके कहने पर ऑपरेशन सिंदूर के बाद सर्वदलीय प्रतिनधि मण्डल में पार्टी नेतृत्व से पूछे बिना शामिल हो गए। इसीलिए उन्होंने राहुल गांधी को परिवारवाद पर घेरा भी और अब पुतिन के सम्मान भोज में भी शामिल हो गए। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा था कि वह रूसी राष्ट्रपति ब्लादिमीर पुतिन के सम्मान में आयोजित भोज में शामिल होंगे और वे शामिल हुए भी। उन्होंने कहा था कि पता नहीं किस आधार पर निमंत्रण दिया जा रहा है, लेकिन मैं जरूर जाऊंगा। उन्होंने ये भी कहा कि यह ठीक नहीं है कि विपक्ष के नेताओं को आमंत्रित नहीं किया गया है।
एक दिन पहले ही कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केन्द्र सरकार पर आरोप लगात हुए कहा था कि आमतौर पर परंपरा है कि जो भी बाहर से आता है, वह विपसेक्ष के नेता से मिलता है। ऐसा वाजपेयी, मनमोहन सिंह की सरकारों के दौरान होता था। लेकिन आज-कल विदेशी मेहमान या जब मैं विदेश जाता हूं तो केन्द्र सरकार विपक्ष के नेता न मिलने की सलाह देती है। राहुल गांधी के इन आरोपों को सरकारी सूत्रों ने निराधार बताते हुए खारिज किया था। सरकार ने बताया था कि राहुल गांधी 9 जून 2024 को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष बने थे और वह अब तक चार राष्ट्राध्यक्षों से मिल चुके हैं। इनमें बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना भी शामिल हैं। लेकिन सरकार के पास इस बात का कोई जबाब नहीं कि पुतिन के मामले में ऐसा क्यों नहीं हुआ।
हकीकत ये है कि हमारे प्रधानमंत्री मोदी पुतिन से ही प्रेरणा लेकर विपक्ष की मिट्टी कूट रहे हैं। शशि थरूर को मोदी तोड़ चुके हैं, लेकिन औपचारिक रूप से उन्हें भाजपा में शामिल नहीं किया गया है। मोदी चाहते हैं कि शशि भाजपा में आएं तो अपने जैसे राहुल पीड़ित दस पांच और कांग्रेसी सांसद भी लाएं। मैं कांग्रेस या भाजपा की अंदरूनी राजनीति पर कोई टिप्पणी नहीं करता, किंतु कांग्रेस को सलाह जरूर दे सकता हूं कि उसे शशि थरूर को आजाद कर देना चाहिए, क्योंकि अब शशि थरूर कांग्रेसी नहीं रह गए हैं, वे मोदीमय हो चुके हैंद्ध ये सब अस्वाभाविक भी नहीं है। उनकी अपनी मजबूरी और जरूरतें भी इसकी वजह हो सकती हैं। कांग्रेस को ये भी गांठ बांध लेना चाहिए कि मोदी का परंपराओं से, नैतिकता से, नजीरों से कोई लेना-देना नहीं है। वे रत्तीभर नहीं सुधरेंगे। सुधरना कांग्रेस को ही है।


