– नियम-कायदों पर उठे गंभीर सवाल, जहां कभी चलती थीं उत्पादन इकाईयां, वहां अब बसाई जा रही कॉलोनियां
भिण्ड, 11 जून। प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक केन्द्रों में शामिल मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र में औद्योगिक भूमि पर कथित रूप से की जा रही आवासीय प्लॉटिंग का मामला अब जन चर्चा का विषय बनता जा रहा है। क्षेत्र के नागरिकों, उद्योग जगत से जुड़े लोगों तथा सामाजिक संगठनों का कहना है कि जिस भूमि पर वर्तमान में आवासीय प्लॉट काटकर बेचे जा रहे हैं, वहां वर्षों पहले बड़ी-बड़ी औद्योगिक इकाईयां संचालित हुआ करती थीं। इन इकाइयों में उत्पादन कार्य होता था, स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलता था और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों का एक महत्वपूर्ण केन्द्र यही परिसर हुआ करते थे।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उद्योगों के बंद होने के बाद संबंधित परिसरों को धीरे-धीरे ध्वस्त किया गया और अब उन्हीं औद्योगिक परिसरों की भूमि को छोटे-छोटे भूखण्डों में विभाजित कर आवासीय प्लॉट के रूप में बेचा जा रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह बताई जा रही है कि यह पूरा क्षेत्र आज भी चारों ओर से संचालित औद्योगिक इकाईयों से घिरा हुआ है तथा आस-पास अनेक उद्योग नियमित रूप से कार्यरत हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि संबंधित भूमि औद्योगिक उपयोग के लिए आरक्षित रही है और इसी कारण यहां हो रही प्लॉटिंग को लेकर अनेक सवाल खड़े हो रहे हैं।
मामले को लेकर क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि संबंधित भूमि के आसपास कई प्रमुख औद्योगिक इकाईयां संचालित हैं, जिनमें गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड सहित अन्य उद्योग शामिल हैं। ऐसे में उद्योगों के मध्य विकसित हो रही आवासीय बसाहट को लेकर सुरक्षा, प्रदूषण और भविष्य में संभावित विवादों की आशंका व्यक्त की जा रही है।
औद्योगिक विकास के लिए दी गई भूमि का बदल रहा स्वरूप
मालनपुर औद्योगिक क्षेत्र की स्थापना प्रदेश में औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई थी। शासन द्वारा उद्योगों को भूमि उपलब्ध कराई गई ताकि यहां उत्पादन इकाईयां स्थापित हों और क्षेत्र का समग्र विकास हो सके। अब स्थानीय नागरिक यह सवाल उठा रहे हैं कि यदि औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित भूमि पर धीरे-धीरे आवासीय कॉलोनियां विकसित होने लगेंगी तो औद्योगिक क्षेत्र का मूल उद्देश्य ही प्रभावित हो जाएगा। नागरिकों का कहना है कि जिस भूमि पर कभी उद्योग स्थापित करने के लिए अनुमति दी गई थी, उसका उपयोग यदि आवासीय प्लॉटिंग के लिए किया जा रहा है तो संबंधित विभागों को इसकी वैधानिक स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
खरीदारों के हित भी दांव पर
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसे मामलों में सबसे अधिक जोखिम उन लोगों को होता है जो अपनी जीवनभर की जमा-पूंजी लगाकर प्लॉट खरीदते हैं। यदि बाद में भूमि उपयोग, कॉलोनी अनुमोदन, भवन निर्माण अनुमति अथवा अन्य वैधानिक विवाद सामने आते हैं तो नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ सकता है। लोगों का कहना है कि किसी भी प्लॉट या कॉलोनी में निवेश करने से पहले खरीदारों को संबंधित भूमि का उपयोग, स्वीकृत नक्शा, कॉलोनाइजर लाइसेंस, राजस्व अभिलेख तथा विभागीय अनुमतियों की जांच अवश्य करनी चाहिए।
प्रदूषण और सुरक्षा मानकों की भी हो जांच
नागरिकों ने मांग की है कि मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग, राजस्व विभाग, जिला प्रशासन तथा औद्योगिक विकास से जुड़े विभाग संयुक्त रूप से यह जांच करें कि संबंधित भूमि की वर्तमान वैधानिक स्थिति क्या है और वहां आवासीय विकास के लिए आवश्यक सभी शर्तों का पालन किया गया है या नहीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि भूमि वास्तव में औद्योगिक उपयोग के लिए आरक्षित रही है और आज भी उसके आसपास सक्रिय औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं, तो इस पूरे मामले की गहन जांच होना जनहित में आवश्यक है।
प्रशासन के सामने खड़े हुए बड़े सवाल
– क्या संबंधित भूमि मूल रूप से औद्योगिक उपयोग के लिए आवंटित की गई थी?
– क्या उक्त परिसर में पूर्व में औद्योगिक इकाइयां संचालित होती थीं?
– क्या उद्योग बंद होने के बाद भूमि उपयोग परिवर्तन की वैधानिक प्रक्रिया पूरी की गई?
– क्या संबंधित कॉलोनाइजर के पास कॉलोनी विकास की सभी आवश्यक स्वीकृतियां हैं?
– क्या प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड एवं अन्य विभागों से आवश्यक अनापत्तियां प्राप्त की गई हैं?
– क्या खरीदारों को भूमि की वास्तविक स्थिति और अनुमतियों की पूरी जानकारी दी जा रही है?
– क्या औद्योगिक क्षेत्र के मध्य विकसित हो रही आवासीय बसाहट भविष्य में सुरक्षा और प्रदूषण संबंधी समस्याओं को जन्म दे सकती है?
प्रशासन का पक्ष नहीं मिल सका
मामले के संबंध में भिण्ड कलेक्टर किरोड़ीलाल मीणा से दूरभाष पर संपर्क कर उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक उनका फोन रिसीव नहीं हो सका। पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
उच्च स्तरीय जांच की मांग
मालनपुर क्षेत्र के नागरिकों ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव उद्योग, जिला प्रशासन, नगर एवं ग्राम निवेश विभाग, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड तथा संबंधित औद्योगिक विकास एजेंसियों से मामले की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि औद्योगिक क्षेत्र की मूल पहचान सुरक्षित रहे और आम नागरिकों की मेहनत की कमाई किसी विवादित परियोजना में फंसने से बच सके। फिलहाल यह मामला क्षेत्र में व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग प्रशासन से इस पूरे प्रकरण पर स्पष्ट एवं पारदर्शी कार्रवाई की अपेक्षा कर रहे हैं।


