– राकेश अचल
ईरान-अमेरिका युद्ध के बीच सीजफायर और बातचीत कराने में भारत की दिलचस्पी हो या न हो लेकिन बंगाल विधान सभा चुनाव में गाल बजाने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कोई मुकाबला नहीं कर सकता। मेरे जैसे तमाम लोग मोदी जी की इसी अदा पर फिदा हैं।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इजराइल और अमेरिका को भले ही ईरान पर हमला करने के लिए न हटकते हों किंतु बंगाल की टीएमसी सरकार पर जोरदार प्रहार करते हैं। मोदी जी ने कहा कि बंगाल में टीएमसी मां, माटी, मानुष का नारा लगाकर सत्ता में आई थी, लेकिन अब घुसपैठियों द्वारा घुसपैठियों के वोट से, घुसपैठियों की सरकार बनाना चाहती है। मोदी जी झूठ बोलते हैं या सच, मैं नहीं जानता लेकिन वे बोलते हैं तो बोलते ही चले जाते हैं। मुस्लिम बहुल मुर्शिदाबाद जिले के जंगीपुर में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि बंगाल अब तुष्टीकरण और वोटबैंक के खेल को और बर्दाश्त नहीं करेगा।
प्रधानमंत्री की चिंता हार्मुज नहीं है, वे राज्य में घुसपैठ व डेमोग्राफी में तेजी से बदलाव से चिंतित हैं। मोदी ने कहा कि हम बंगाल में बंगालियों को अल्पसंख्यक नहीं बनने देंगे। विधानसभा चुनाव में भाजपा की जीत का विश्वास जताते हुए मोदीजी ने लोगों को भरोसा दिया कि बंगाल में अब डर या भय का नहीं, अवसर का युग आएगा। प्रधनमंत्री ने कहा कि राष्ट्र की सुरक्षा हमारे लिए सर्वोपरि है। भाजपा का संकल्प है कि बंगाल में सभी के लिए एक कानून- समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू कर तुष्टीकरण की राजनीति को हमेशा के लिए खत्म किया जाएगा। पता नहीं उन्हें किसने कह दिया कि बंगाल अब भाजपा के साथ चलने का फैसला कर चुका है। मोदी जी गारंटी देते हुए कहते हैं कि भाजपा ने जो संकल्प लिया है, वो सिर्फ चुनावी वादा नहीं है, यह टीएमसी के महाजंगलराज और सिंडिकेट राज के अंत का शंखनाद है। मोदीजी को गुजरात से ज्यादा बंगाल का इतिहास पता है, इसीलिए वे कहते हैं कि हमारे बंगाल का इतिहास रहा है कि बंगाल जब परिवर्तन की ठान लेता है, तो उसे दुनिया की कोई ताकत रोक नहीं पाती। उन्होंने कहा कि आजादी की लड़ाई से लेकर आजादी के बाद तक, जिस-जिसने बंगाल को चुनौती दी, उसका अहंकार चूर-चूर हो गया। पहले अंग्रेजों का अहंकार टूटा, फिर कांग्रेस का अहंकार टूटा, फिर लेफ्ट का अहंकार टूटा, अब टीएमसी का अहंकार भी चूर-चूर होगा।लेकिन बंगाल को चुनौऔती तो भाजपा दे रही है. उसके अहंकार का क्या होगा, ये मोदीजी को पता नहीं।
मोदी को पता है कि बंगाल की जनता ने लेफ्ट को निकाला। बड़ी आशा और उमंग के साथ मां, माटी, मानुष की बातें सुनकर टीएमसी को मौका दिया, लेकिन सत्ता में आते ही तृणमूल, लेफ्ट की कार्बन कापी बन गई। लेफ्ट के गुंडे तृणमूल में आ गए। लेफ्ट का सिंडिकेट तृणमूल में आ गया। पहले वोट के लिए लेफ्ट वाले धमकी देते थे, फिर वही गुंडे टीएमसी को वोट देने के लिए धमकी देने लगे। हथियार, नशे, मवेशियों की तस्करी, लेफ्ट का कट-कमीशन सबका ठेका टीएमसी ने ले लिया है। लेकिन मोदीजी को किसी ने शायद नहीं बताया कि टीएमसी के तमाम नेता भाजपा में भी आए हैं। उनका क्या होगा?
मोदी जी की मुश्किल ये है कि जब तक जनता भाजपा की सरकार नहीं बनाती तब तक वे किसी राज्य पर केन्द्र की कृपा नहीं बरसाते। वे अब कह रहे हैं कि यदि बंगाल में भाजपा सत्ता में आई तो कि बंगाल में अब एक और एम्स, आईआईटी और आईआईएम जैसे संस्थान भी बनेंगे, उन्होंने पश्चिम बंगाल के राज्य कर्मियों को सातवां वेतनमान देने का भी वादा किया। बर्धमान की इस रैली में मोदी ने न केवल टीएमसी के 15 साल के पाप का हिसाब मांगा, उन्होंने कहा कि टीएमसी के गुण्डों पर भी कार्रवाई भी होगी। अब देखना है कि लगातार अप्रासंगिक हो रहे मोदी जी इस बार भी बंगाल जीत पाते हैं या नहीं? मेरी शुभकामनाएं उनके साथ हैं।


