– यात्रियों की सजगता से खुला राज, पुलिस ने मिलाया परिजनों से
भिण्ड, 23 फरवरी। मां की डांट से आहत होकर घर छोड़ने वाला 13 वर्षीय बालक कई जिलों की दूरी तय कर भटकता हुआ आखिरकार सुरक्षित अपने परिजनों तक पहुंच गया, इस पूरे घटनाक्रम में मानवीय संवेदनाओं और पुलिस की तत्परता ने एक परिवार को बिखरने से बचा लिया।
जानकारी के अनुसार फिरोजाबाद उप्र निवासी 13 वर्षीय बालक किसी बात पर मां की डांट से नाराज होकर बिना बताए घर से निकल गया। वह बस में सवार होकर पहले इटावा पहुंचा। संयोगवश उसी बस में भिण्ड के कुछ यात्री भी सवार थे, इटावा बस स्टैंड पर जब सभी यात्री उतरे तो उन्होंने बालक को घबराया और परेशान हालत में देखा। भिण्ड के यात्रियों ने मानवता का परिचय देते हुए बालक से बातचीत की, पूछताछ में उसने बताया कि वह मौ क्षेत्र के पास किसी गांव का रहने वाला है और फिरोजाबाद से बस में बैठकर आया है, उसकी बातों और स्थिति से स्पष्ट था कि वह घर से भटक कर आया है, ऐसे में यात्रियों ने उसे अकेला छोड़ना उचित नहीं समझा और अपने साथ भिण्ड ले आए। भिण्ड पहुंचने पर बालक को तत्काल भिण्ड की कोतवाली थाना भिण्ड पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया। थाना प्रभारी बृजेन्द्र सेंगर ने बालक से संवेदनशीलता के साथ पूछताछ की, बालक ने अपना निवास मौ के पास बताया और फिरोजाबाद से आने की बात दोहराई, इसके बाद कोतवाली पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए मौ क्षेत्र की पुलिस से संपर्क किया और बालक की फोटो व विवरण साझा किया। स्थानीय पुलिस द्वारा बताए गए पते पर जांच की गई, जहां बालक के परिजनों की पुष्टि हुई।
परिजनों की आंखों में खुशी के आंसू
सूचना मिलते ही बालक के परिजन और रिश्तेदार कोतवाली थाना भिण्ड पहुंचे। आवश्यक औपचारिकताओं के बाद बालक को सकुशल उनके सुपुर्द कर दिया गया, बेटे को सुरक्षित पाकर माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। परिजनों ने भावुक होकर कहा कि अगर कोतवाली पुलिस समय पर मदद न करती तो हमारी जिंदगी उजड़ जाती। हमें समझ नहीं आ रहा था कि हमारा बेटा कहां चला गया है। पुलिस और उन सज्जनों का हम जीवनभर आभार मानेंगे जिन्होंने हमारे बच्चे को सुरक्षित लौटाया।
मानवता और पुलिस की सजगता बनी मिसाल
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि यदि समाज और पुलिस मिलकर संवेदनशीलता से कार्य करें तो बड़ी से बड़ी आशंका को भी टाला जा सकता है। भिण्ड के यात्रियों की सजगता और कोतवाली पुलिस की त्वरित कार्रवाई ने एक परिवार को टूटने से बचा लिया। यह घटना अभिभावकों और बच्चों दोनों के लिए सीख भी है कि क्षणिक आवेश में लिया गया निर्णय कितनी बड़ी मुसीबत खड़ी कर सकता है।


