– राकेश अचल
मुझे भारत और अमेरिका के बीच हुई बहुप्रतीक्षित ट्रेड डील को लेकर 1949 में बनी अंदाज फिल्म का गीत ‘झूम झूम के नाचो आज, गाओ आज, गाओ खुशी के गीत हो, गाओ खुशी के गीत, आज किसी की हार हुई है, आज किसी की जीत हो, गाओ खुशी के गीतÓ की बरबस याद आ गई। मुझे लगता है कि मजरूह सुल्तानपुरी ने ये गीत इस ट्रेड डील के लिए ही लिखा होगा। भारत अमेरिका से पेट्रोलियम, डिफेंस, इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मास्यूटिकल्स, टेलीकॉम प्रोडक्ट्स और विमान खरीदने वाला है।
भारत और अमेरिका के बीच पिछले 5-6 महीने से तनातनी चल रही थी। भारत मौन था, लेकिन अमेरिका आक्रामक तरीके से व्यवहार कर रहा था। लेकिन अब अमेरिका ने ही ऑपरेशन सिंदूर के युद्धविराम की तरह इस डील का ऐलान करते हुए कहा है कि दोनों पक्षों की बातचीत के बाद ट्रेड डील पर अधिकारिक मोहर जल्द लगेगी। इस डील का उद्देश्य भारत के साथ अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करना है और आने वाले सालों में इससे कई सेक्टर्स पर प्रभाव पड़ने की उम्मीद है। भारत सरकार इस डील के बारे में कुछ भी बोलने से कतराती रहती है। इसलिए भारतीयों को रॉयटर्स जैसी ऐजेंसियों पर भरोसा करना पड़ता है। रायटर्स का दावा है कि भारत ने कुछ एग्रीकल्चर वस्तुओं के अपने बाजार खोलने की बात कही है। हालांकि इसके बारे में कोई डिटेल का खुलासा नहीं किया गया है। वहीं एक्सपर्ट्स भी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऐलान के अलग-अलग मायने निकाल रहे हैं, जिसमें ट्रंप ने दावा किया है कि भारत ने अमेरिका पर 0 फीसदी टैरिफ लगाएगा।
यह डील तब हो रही है जबकि संसद का बजट सत्र चल रहा है। कायदे से भारत सरकार को इस डील के बारे में सबसे पहले संसद को सूचित करना चाहिए था, किंतु ऐसा नहीं हुआ। हो भी नहीं सकता था, क्योंकि आज-कल संसद को सरकार कुछ समझती ही कहां है? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने समझौते की पुष्टि करते हुए कहा कि भारत काफी उच्च स्तर पर अमेरिकी उत्पाद खरीदने पर सहमत हो गया है और वह 500 अरब डॉलर तक के अमेरिकी एनर्जी, कोयला, टेक्नोलॉजी, एग्रीकल्चर और अन्य उत्पाद खरीद सकता है।
द्विपक्षीय व्यापार में संतुलन स्थापित करने के उद्देश्य से अमेरिका के एक महत्वपूर्ण अनुरोध के जवाब में भारत ने समझौते के तहत ऑटोमोबाइल पर टैरिफ कम कर दिए हैं। इसका मतलब है कि अमेरिका से भारतीय बाजार में आने वाली गाड़ियों पर कम टैरिफ लगेगा और ये पहले से कम कीमत पर मिल सकते हैं। ये उपाय मौजूदा व्यापार असंतुलन को दूर करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। भारत और अमेरिका के बीच हुई इस डील से भारत के आम नागरिक को क्या हासिल होगा ये तो राम ही जाने लेकिन एक बात साफ है कि भारत को उसके सब्र का लाभ हु आ है। मोटे तौर पर प्रवासी भारतीयों ने तो राहत की सांस ली है। क्योंकि इस डील को लेकर अमेरिका ने भारत सरकार पर इतना दबाव डाला कि प्रवासी भारतीयों की नाक में दम कर दी थी।
मौजूदा समझौते को पहली किश्त बताया जा रहा है कि आने वाले महीनों में आगे की बातचीत से इसका दायरा बढ़ने की उम्मीद है। निवेशकों का रुझान सकारात्मक रहा, शुरुआती कारोबार में भारत का निफ्टी 50 सूचकांक लगभग 3 प्रतिशत बढ़ा और रुपया एक फीसदी से अधिक मजबूत होकर 90.40 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। भारत के व्यापार मंत्रालय ने अभी तक समझौते पर कोई आधिकारिक टिप्पणी या कृषि उत्पादों के लिए बाजार पहुंच के संबंध में कोई और जानकारी नहीं दी है। गौरतलब है कि वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार जनवरी से नवंबर के बीच भारत का अमेरिका को निर्यात सालाना आधार पर 15.88 प्रतिशत बढ़कर 85.5 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 46.08 अरब डॉलर रहा।


