भिण्ड, 11 जनवरी.मनीष दुबे। शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में भिण्ड जिले में सर्व हिन्दू समाज द्वारा आयोजित किए जा रहे विशाल हिन्दू सम्मेलनों की श्रृंखला में आज शिवा उपनगर, सावरकर उपनगर, दयानंद उपनगर, दबोहा मंडल, कोंहार मंडल एवं मालनपुर मंडल में हिन्दू सम्मेलनों का आयोजन किया गया।
शिवा उपनगर का हिन्दू सम्मेलन मेला परिसर में आयोजित किया गया। जिसमें संत सुवल सागर महाराज ने अपने उद्बोधन में कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ सभी सामाजिक लोगों एवं सनातनी लोगों को जोड़ने का प्रयास निरंतर कर रहा है, जब हमारा भारत देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा हुआ था उस समय इसको आजाद कराने में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की अहम भूमिका रही। उन्होंने कहा कि जीते जी तो सभी जीते हैं मृत्यु के बाद जो जीता है वही जीवंत जीवन है। इसलिए हमें हमेशा सामाजिक कार्य सभी जीवों के प्रति दयाभाव निरंतर बनाए रखना चाहिए। उन्होने कहा कि मैत्रीभाव जगत में मेरा, सभी जीवों से नित्य रहे। आज सर्व समाज द्वारा आयोजित हिन्दू सम्मेलनों के माध्यम से हम सभी में एकता, शक्ति और सामर्थ्य का भाव जागृत होता है।
कार्यक्रम में उपस्थित कुंजबिहारी ने संघ की विकास यात्रा और संघ द्वारा किए जा रहे सामाजिक एवं रचनात्मक कार्यों पर प्रकाश डाला। मातृ शक्ति के रूप में उपस्थित मनीषा शर्मा ने संघ द्वारा पंच परिवर्तन के रूप में किए जा रहे सामाजिक बदलाव के लिए किए जा रहे कार्यों प्रयासों के बारे में बताया कि वर्तमान में कुटुम्ब व्यवस्था को व्यवस्थित रखने का कार्य हमसब मातु शक्ति का है पर्यावरण एवं नागरिक शिष्टाचार एवं कर्तव्यों का पालन करना हम सभी का दायित्व है।
दयानंद उपनगर में जिला प्रचारक शिवांसु जी ने अपने उद्बोधन में कहा कि आज विधर्मी ताकतों द्वारा हिन्दू समाज को जातियों में बांटने का षड्यंत्र रचा जा रहा है, लेकिन देश को तोड़ने वाली ऐसी ताकतें अपने उद्देश्य में कभी कामयाब नहीं होंगी। क्योंकि आज संघ और संत समाज के प्रयासों से हिन्दू समाज उन्हें जाग्रत एवं संगठित हो रहा है। समरस हिन्दू समाज से ही देश समर्थ शक्तिवान और विश्व का मार्गदर्शन करने वाला बन सकेगा। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि आज की युवा शक्ति भारत का भविष्य हैं हमारे भारत का युवा संस्कारित एवं ऊर्जावान है।
मातृ शक्ति के रूप में उपस्थित स्नेहलता भदौरिया ने कहा कि राष्ट्र की प्रगति एवं उन्नति में मातृ शक्ति की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में संयुक्त परिवार की अत्यंत आवश्यकता है, एकल परिवार राष्ट्र की प्रगति में बाधा है, परिवार में बच्चों को संस्कार देने एवं प्रत्येक घर से एक स्वयंसेवक समाज के लिए कार्य करने हेतु निकले एक कार्य मातृशक्ति ही कर सकती है। कार्यक्रम में हरिओम दास महाराज, कार्यक्रम संयोजक पुरुषोत्तम, सत्यनाम शाक्य, ज्योति परिहार रोमेश लहरिया मंचासीन रहे।
दबोहा मंडल के हिन्दू सम्मेलन में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित राजेश कुशवाह ने कहा कि हिन्दू सदैव ही विश्व बंधुत्व की बात करता आया है, हम अपने मन्दिरों में किसी धर्म विशेष की जय नहीं बोलते, हम बोलते हैं धर्म की जय हो, अधर्म का नाश हो। रावण जैसी शक्ति सिर्फ अधर्म की वजह से नष्ट हुई। संघ एवं संत समाज हिंदू धर्म को जागृत करने का ,संगठित करने का और समाज में समरसता लाने का कार्य निरंतर रूप से करता रहा है। राष्ट्र सर्वोपरि है। व्यक्ति निर्माण से ही समाज निर्माण होता है और समाज निर्माण से ही राष्ट्र निर्माण संभव है। भारत का भविष्य उसकी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने में निहित है। जब जब हिंदू समाज जागा है और संगठित हुआ है भारत देश और उसके गांव सशक्त और उन्नत हुए हैं। संघ अपनी स्थापना की शताब्दी वर्ष को मना रहा है। इस 100 वर्ष के काल में संघ का हिंदू समाज के उत्थान और संगठन में अभूतपूर्व योगदान रहा। कार्यक्रम में सीमा शर्मा, रामजीलाल शर्मा, प्रहलाद दास महाराज मंचासीन रहे।
सावरकर उपनगर का दो सम्मेलन आईटीआई परिसर में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शुभेनदु नारायण महाराज, ब्रजलता श्रीवास्तव, योग गुरु जीतानंद महाराज, बौद्ध भिक्षु दमयरमन महाफेरो, रमा कुशवाह एवं रामानंद शर्मा मंचासीन रहे। वक्ता रामानंद शर्मा ने कहा कि आज सामाजिक समरसता हिन्दू समाज की एकता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, एक पनघट एक मरघट और एक पूजा स्थल पर सभी भेद समाप्त हो हो जाते हैं। संतुलित पर्यावरण, नागरिक कर्तव्यों के प्रति हमारी सजगता, कुटुम्ब प्रबोधन के लिए संयुक्त और संस्कारित परिवार एवं स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करेंगे तभी भारत समर्थ और आत्मनिर्भर बन सकेगा।
मातृ शक्ति के रूप में उपस्थित ब्रजलता श्रीवास्तव ने कहा कि परिवार संस्कारों की प्रथम सीढ़ी है, कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से परिवारों को संस्कारों से जुड़ने और पर्यावरण संरक्षण के लिए पेड़ लगाने जल बचाने तथा समाज को प्लास्टिक मुक्त बनाने की अपील की साथ ही सामाजिक समरसता पर बल देते हुए भेदभाव मिटाकर गौरवशाली इतिहास के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। हिन्दू सम्मेलनों में शहरी एवं ग्रामीण अंचल से हजारों की संख्या में मातृशक्ति एवं जन समुदाय की भागीदारी रही। कार्यक्रम के समापन पर सभी हिन्दू सम्मेलनों में प्रसादी भंडारे का आयोजन भी किया गया।


