– भारत विकास परिषद शाखा भिण्ड द्वारा मेडिटेशन शिविर का आयोजन
भिण्ड, 26 दिसम्बर.मनीष दुबे। भारत विकास परिषद शाखा भिण्ड द्वारा चलाए जा रहे संस्कृति सप्ताह के दूसरे दिन राष्ट्रीय सेवा योजना के शिविर में ध्यान (मेडिटेशन) व योग शिविर आयोजित किया गया। इस अवसर पर रामचंद्र मिशन हार्टफुलनेस संस्थान के प्रशिक्षक रेखा सोनी, रामलखन शर्मा एवं अनिल शिवहरे द्वारा ध्यान (मेडिटेशन) शिविर में प्रशिक्षण दिया गया। ध्यान शिविर का शुभारंभ एनएसएस अधिकारी डॉ. धीरज गुर्जर, भाविप अध्यक्ष जयप्रकाश शर्मा, सचिव राजमणि शर्मा ने मां सरस्वती एवं विवेकानंद जी के चित्र पर दीप प्रज्जवलन व माल्यार्पण कर किया।
परिषद के अध्यक्ष जयप्रकाश शर्मा ने कहा कि ध्यान (मेडिटेशन) प्रक्रिया का उद्देश्य तनाव को दूर करना, कार्य कुशलता को बढ़ाना, समाज एवं कार्य क्षेत्र में सामंजस्य बनाना, सकारात्मक सोच विकसित करना, सेवाभाव विकसित करना करना है। हमें नियमित रूप से ध्यान करने से मन की शांति मिलती, तनाव का कम करना, आदतों में परिवर्तन, स्वंय को जागरूक, इस प्रकार के विभन्न लाभ मिलते है। ध्यान के वारे मे वैज्ञानिक महत्व व न्यूरोंस की सक्रियता और उसके माध्यम से शरीर मे होने बाले परिवर्तन से अवगत कराया। ध्यान के सभी चरण रिलैक्सेशन, ध्यान, सफाई, प्रार्थना कों सीखने की बात कही।
हार्टफुलनेस संस्थान से रेखा सोनी एवं रामलखन शर्मा ने बताया कि हृदय पर केन्द्रित एक एक जीवनशैली है, सर्वप्रथम आंखें अत्यंत कोमलता से और हल्के से बंद कर शरीर को रिलैक्स करा कर हृदय में मौजूद दिव्य प्रकाश के स्त्रोत पर ध्यान कराया, साथ ही धरती मां की आरोग्यकारी ऊर्जा कों पैरों की उंगलियों से आरम्भ कर संपूर्ण शरीर एवं मस्तिष्क कों अपने हृदय में विद्यमान प्रेम व प्रकाश में केन्द्रित करना सिखया गया, साथ ही ध्यान शिविर में तनाव मुक्ति, ध्यान, सफाई, प्रार्थना पर प्रशिक्षण दिया गया। रामलखन शर्मा ने ध्यान की सिटिंग दी।
डॉ. धीरज गुर्जर ने कहा कि आज विश्व स्तर पर व्यक्ति के अंदर धीरे-धीरे हैपीनेस समाप्त होती चली जा रही है। ध्यान के माध्यम से हम हर पल अपने हृदय का अनुसरण करते हैं। हृदय के गुणों और भावों के साथ स्वाभाविक रूप से जीना सीखते हैं। रिलैक्सेशन, ध्यान, सफाई और प्रार्थना ये अभ्यास अपने आप में अनोखे हैं, हमारे विचारों और भावनाओं की जड़ें हृदय में होती हैं और उसी प्रकार हमारे हृदय की दशा हमारी मानसिक, भावनात्मक और आध्यात्मिक अवस्थाओं का निर्धारण करती है। ध्यान मानव जीवन के भौतिक और आध्यात्मिक दोनों पक्षों के सामंजस्य के लिए कार्य करता है। साथ ही सभी लोगों कों स्वयं ओर अपने परिवार के साथ 20 से 30 मिनिट ध्यान करने के लिए कहा कि तभी हमे इसके प्रभावी परिणाम प्राप्त होंगे। कार्यक्रम का संचालन एवं आभार परिषद के सचिव राजमणि शर्मा ने किया। इस दौरान लगभग 80 से अधिक लोग उपस्थित रहे।


