– प्रमुख पेंशन ऐसासिएशन की बैठक आयोजित
भिण्ड, 24 दिसम्बर। मप्र के पेंशनरों की विभिन्न मांगों को लेकर हमारा संगठन पिछले कई वर्षों से ज्ञापन एवं आंदोलन कर संघर्ष करता आ रहा है। पेंशनरों ने अपना पूरा जीवन शासन और समाज की सेवा में समर्पित कर दिया है, लेकिन सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। यह बात प्रमुख पेंशनर्स एसोसिएशन प्रांतीय महामंत्री मोहन सिंह कुशवाह संगठन की बैठक में कही।
इस अवसर पर प्रांतीय संगठन सचिव विजय दैपुरिया ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई के दौर में वर्तमान पेंशन से पेंशनरों की आवश्यकता को पूरा करने नाकाफी साबित हो रही है। सरकार बार-बार आश्वासन दे रही है, लेकिन मांगों के निराकरण की दशा में ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं, प्रमुख पेंशनर्स एसोसिएशन द्वारा कई बार ज्ञापन के माध्यम से अपनी बात शासन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया, इसके बाबजूद पेंशनरों की समस्याएं जस तस बनी हुई है।
संगठन की मांग है कि मप्र छत्तीसगढ़ पुनर्गठन अधिनियम 2000 की धारा 49 परिशिष्ट 6 में सहमति का कोई प्रावधान नहीं है, अधिनियम की धारा प्रभावशील हुए तकरीबन 25 वर्ष से अधिक हो चुके हैं अत: धारा विलोपित की जाए। शासकीय राज्य कर्मचारियों एवं पेंशनरों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना वर्ष 2000 में मुख्यमंत्री राज्य कर्मचारियों के लिए लागू की गई थी, किंतु उसका क्रियाबन नहीं हो पाया था। अत: राज्य कर्मचारी एवं पेंशनरों को स्वास्थ्य बीमा योजना की लागू की जाए। संभागीय एवं जिला पेंशन कार्यालय यथावत रखे जाए। प्रदेश के पेंशनर्सको अतिरिक्त पेंशन हिमाचल सरकार के अनुरूप स्वीकृत की जाए। 30 जून एवं 31 दिसंबर को देय वेतन वृद्धि का लाभ पेंशनर को दिया जाए। छटवे वेतन आयोग का एरियर एवं सातवें वेतन आयोग का एरियर तथा पेंडिग एरियर का भुगतान शीघ्र किया जाए। पेंशनर्स फोरम तथा संभागीय स्वास्थ्य समिति का गठन एवं नियमित बैठकों के निर्देश जिला कलेक्टर एवं संभाग आयुक्त को शीघ्र दिए जाए। संगठन की मांग है कि 65 वर्ष की आयु पर 5 प्रतिशत, 70 की आयु पर 10 प्रतिशत, 75 वर्ष की आयु पर 15 प्रतिशत एवं 80 वर्ष की आय पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन दी जाए।
बैठक में गंगा सिंह भदौरिया, मीडिया प्रभारी राधाकांत शर्मा, रमेशबाबू शर्मा, रामदत्त शर्मा, रामबरन सिंह कुशवाह, बिजेन्द्र सिंह कुशवाह, जयनारायण श्रीवास्तव, कृष्णस्वरूप शर्मा, आजाद खान, नारायण स्वरूप शर्मा, केके अवस्थी, आनंद किशोर दुबे, संतकुमार जैन, शेरसिंह कुशवाह, जनक सिंह नरवरिया आदि उपस्थित रहे।

