भिण्ड, 03 दिसम्बर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शा. एमजेएस महाविद्यालय भिण्ड में कंप्यूटर साक्षरता दिवस के अवसर पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय प्राचार्य डॉ आरए शर्मा और स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ प्रभारी प्रो. मोहित कुमार दुबे के मार्गदर्शन और निर्देशन में किया गया। कार्यशाला का आयोजन विद्यार्थियों के साथ ऑनलाइन, ऑफलाइन मोड में किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता रूप में माधव आदर्श विज्ञान महाविद्यालय ग्वालियर में कंप्यूटर विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. केके पाराशर ने विद्यार्थियों को डिजिटल युग में साक्षरता को बढ़ावा देना विषय पर व्याख्यान प्रदान किया गया।
डॉ. पाराशर ने विद्यार्थियों को बताया कि डिजिटल शब्द में डिजिट शब्द उसके व्यवहार को प्रकट करता हैं। आज कल शासन द्वारा स्कूलों और कॉलेजों में डिजिटल शिक्षा को अनिवार्य कर दी गई है, वंचितों को लक्षित प्रशिक्षण दिया जा रहा है और डिजिटल कौशल विकास के लिए ऑनलाइन और सामुदायिक पहल का उपयोग करना बहुत जरूरी है। इसका मतलब केवल पढ़ना-लिखना नहीं है, बल्कि डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रूप से एक्सेस, समझ और साझा करने की क्षमता भी है। कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक तकनीक ने न केवल कई लोगों के हाथों में साक्षरता पहुंचाई, बल्कि एक ऐसा वातावरण भी बनाया, जिससे विशाल मात्रा में जानकारी संग्रहीत करना संभव हो गया। पुस्तकों और पुस्तकालयों ने जनता के लिए जानकारी आसानी से उपलब्ध कराने का मार्ग प्रशस्त किया, लेकिन कंप्यूटर और इंटरनेट के युग में सुलभ जानकारी की मात्रा पहले से कहीं अधिक बड़ी है, पहले से कहीं अधिक आसानी से उपलब्ध है, और पहले से कहीं अधिक तेजी से बदल रही है। 21वीं सदी की शुरुआत में, तकनीक अतीत की तुलना में अधिक तेजी से विकसित हो रही है, जिससे एक ऐसा वातावरण बन रहा है जो लगातार बदल रहा है। ये परिवर्तन पारंपरिक साक्षरता कौशल से परे विभिन्न कौशल की आवश्यकता में योगदान करते हैं।
प्रो मोहित कुमार दुबे ने विद्यार्थियों को बताया आज कि डिजिटल युग में ऑनलाइन भुगतान धोखाधड़ी जटिल होती जा रही है। इसमें उन्नत तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। 86 प्रतिशत से अधिक परिवार अब इंटरनेट से जुड़े हुए हैं, जो डिजिटल इंडिया पहल के अंतर्गत उल्लेखनीय प्रगति को दर्शाता है। बढ़ते डिजिटल परिदृश्य ने नागरिकों को अपनी उंगलियों पर डिजिटल सेवाओं तक पहुंचने में सक्षम बनाया है। साथ ही इसने साइबर धोखाधड़ी के लिए हमले की संभावनाओं को और भी प्रबल बना दिया है, जिससे साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय प्राथमिकता बन गई है। साइबर सुरक्षा घटनाओं में वर्ष 2022 में 10.29 लाख से वर्ष 2024 में 22.68 लाख तक की यह वृद्धि भारत में डिजिटल खतरों के बढ़ते पैमाने और जटिलता को दर्शाती है। साथ ही, वित्तीय टोल अधिक स्पष्ट होता जा रहा है, 28 फरवरी 2025 तक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर साइबर धोखाधड़ी की सूचना 36.45 लाख रुपए है। जबकि यह संख्याएं बढ़ती चुनौतियों की ओर इशारा करती हैं, आज आवश्यकता है कि हम डिजिटल साक्षरता के साथ-साथ डिजिटल जागरूक भी रहें, तभी हम अपने किसी भी महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट धन और अपनी आत्मरक्षा कर सकते हैं। इस अवसर पर समस्त महाविद्यालय स्टाफ और विद्यार्थी ऑनलाइन ऑफलाइन मोड में उपस्थित है।
Sunday, April 12
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