– राकेश अचल
भाजपा का नारा अब प्रामाणिक लगने लगा है कि मोदी हैं तो मुमकिन है। मोदी जी हैं इसीलिए पहली बार विदेशी बाजारों में अमेरिकी मुद्रा की व्यापक मजबूती और विदेशी पूंजी की लगातार निकासी के कारण रुपया मंगलवार को शुरुआती कारोबार में 32 पैसे टूटकर 89.85 प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर पहुंच गया। जानकार बताते हैं कि कंपनियों, आयातकों और विदेशी निवेशकों की ओर से डॉलर की मजबूत मांग ने रुपए पर दबाव डाला। लेकिन दुर्भाग्य ये है कि हमारे प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री इस बारे में देश को कुछ भी नहीं बताते, पूछने पर भी टाल देते हैं।
ताजा खबर है कि अंतर बैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 89.70 पर खुला। फिर 89.85 प्रति डॉलर के रिकार्ड निचले स्तर पर आ गया जो पिछले बंद भाव से 32 पैसे की गिरावट दर्शाता है। रुपया सोमवार को दिन के कारोबार में 89.79 प्रति डॉलर तक गिरने के बाद 89.53 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था। इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 99.41 पर रहा।
बाजार की भाषा सपाट नहीं होती। आम जनता उसे न पढ़ पाती है और न समझ पाती है। आम जनता को नटों की, टपोरियों की भाषा सुनने की आदत पड़ गई है, जिसमें समझने और समझाने के लिए कुछ होता ही नहीं है। उधर घरेलू शेयर बाजार कहता है कि के शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स 223.84 अंक या 0.26 प्रतिशत की गिरावट के साथ 85,418.06 अंक पर जबकि निफ्टी 59 अंक या 0.23 प्रतिशत की फिसलकर 26,116.75 अंक पर रहा। अंतर्राष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड 0.03 प्रतिशत की गिरावट के साथ 63.15 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर रहा। शेयर बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) सोमवार को बिकवाल रहे थे और उन्होंने शुद्ध रूप से 1,171.31 करोड़ रुपए के शेयर बेचे।
जानकारों का मानना है कि करेंसी में गिरावट की वजह भारती य रिजर्व बैंक से बिना किसी समर्थन के फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर्स की डेली सेलिंग और एन डी एफ एक्सपायरी कवरिंग है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस बात की संभावना है कि भारतीय रजर्व बैंक ने करेंसी को 90 के लेवल से नीचे जाने से रोकने के लिए डॉलर बेचे हों।अब ऐसा हुआ है या नहीं ये केवल सरकार जानती है। हमारी वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण जानती हैं जो एक लंबे समय से जनता के सामने सीतारामी बजट पेश करती आ रही हैं।
आपको याद दिला दूं कि आज के प्रधानमंत्री माननी नरेन्द्र दामोदर दास मोदी ने 2013 में (जब वे गुजरात के मुख्यमंत्री थे) रुपए की गिरावट को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह पर तीखा हमला बोला था। उन्होंने एक भाषण में कहा था- रुपया अस्पताल में है और आईसीयू में भर्ती है। इसके अलावा, उन्होंने सिंह सरकार को दिशाहीन, असहाय और निराश बताया और आरोप लगाया कि संकट के समय नेतृत्व की कमी के कारण देश का दुर्भाग्य हो गया है। उन्होंने रुपये की गिरावट को भ्रष्टाचार से भी जोड़ा।
मोदी ने मनमोहन सिंह की उम्र (तब लगभग 80 वर्ष) से भी तुलना की, कहते हुए कि रुपए का भाव उनकी उम्र के बराबर गिर गया है। यह बयान 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान आया, जब यूपीए सरकार पर आर्थिक संकट के लिए निशाना साधा जा रहा था। अब जब मोदीजी खुद 75 के हुए हैं और रुपए का भाव 89.85 पर पहुंच गया है तब उनकी बोलती बंद है। उन्हें प्रदूषित दिल्ली का मौसम सुहाना लगता है। अब रुपया आईसीयू में नहीं, मृत्यु शैया पर है, फिर भी नो लाज, नो शर्म। सरकार के चेहरे से सिर्फ बेहयाई टपक रही है। मोदीजी का ये बयान विपक्ष द्वारा मोदी सरकार के समय रुपए की गिरावट पर तंज कसने के लिए बार-बार काम आ रहा है। पर सवाल ये है कि रुपए का आने वाले कल में क्या होगा?


