– कांग्रेस ने ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर की संगोष्ठी आयोजित
भिण्ड, 28 नवम्बर। महात्मा ज्योतिबा फुले की पुण्यतिथि पर ग्रामीण जिला कांग्रेस कमेटी के जिला कार्यालय पर उनके छायाचित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर संगोष्ठी आयोजित की गई।
संगोष्ठी को संबोधित करते हुए जिला उपाध्यक्ष महेश जाटव ने कहा कि महात्मा ज्योतिराव गोविंदराव फुले का जन्म 11 अप्रैल 1827 और मृत्यु 28 नवंबर 1890 को हुई। वह एक भारतीय समाज सुधारक, समाज प्रबोधक, विचारक, समाजसेवी, लेखक, दार्शनिक तथा क्रांतिकारी कार्यकर्ता थे। इन्हें महात्मा फुले एवं जोतिबाराव फुले के नाम से भी जाना जाता है। सितंबर 1873 में इन्होंने महाराष्ट्र में सत्य शोधक समाज नामक संस्था का गठन किया। महिलाओं, पिछड़े और अछूतों के उत्थान के लिए इन्होंने अनेक कार्य किए। समाज के सभी वर्गों को शिक्षा प्रदान करने के ये प्रबल समथर्क थे। वे भारतीय समाज में प्रचलित जाति पर आधारित विभाजन और भेदभाव के विरुद्ध थे।
मीडिया प्रभारी पंकज त्रिपाठी ने कहा कि इनका मूल उद्देश्य स्त्रियों को शिक्षा का अधिकार प्रदान करना, बाल विवाह का विरोध, विधवा विवाह का समर्थन करना रहा है। फुले समाज को कुप्रथा, अंधश्रद्धा के जाल से समाज को मुक्त करना चाहते थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन स्त्रियों को शिक्षा प्रदान कराने में, स्त्रियों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने में व्यतीत किया। 19वीं सदी में स्त्रियों को शिक्षा नहीं दी जाती थी। फुले जी महिलाओं को स्त्री-पुरुष भेदभाव से बचाना चाहते थे। उन्होंने कन्याओं के लिए भारत देश की पहली पाठशाला पुणे में बनाई थीं।
कार्यालय प्रभारी रामस्वरूप गोयल ने कहा कि स्त्रियों की तत्कालीन दयनीय स्थिति से फुले बहुत व्याकुल और दुखी होते थे, इसीलिए उन्होंने दृढ़ निश्चय किया कि वे समाज में क्रांतिकारी बदलाव लाकर ही रहेंगे। उन्होंने अपनी धर्मपत्नी सावित्री बाई फुले को स्वयं शिक्षा प्रदान की। इनकी पत्नी सावित्री बाई फुले भारत की प्रथम महिला अध्यापिका बनीं। संगोष्ठी में निर्वाचन विधानसभा भिण्ड प्रभारी अरविन्द यादव (हेबतपुरा), निर्वाचन भिण्ड ग्रामीण ब्लॉक प्रभारी रामसेवक मौर्य, कमलेश सुमन, विवेक जामौर, नवल सिंह आदि उपस्थित रहे।


