– आईआरएस अधिकारी चौहान ने चंबल और बुंदेलखण्ड की मिट्टी से जुड़े रहने का संदेश देने के लिए लिखी पुस्तक
भिण्ड, 24 जून। भारतीय संस्कृति, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक उत्तरदायित्व और नैतिक मूल्यों को केन्द्र में रखकर लिखी गई ‘उड़ चल अपने देश’ केवल एक पुस्तक नहीं, बल्कि जागरूक नागरिकता का घोष है। रक्षा मंत्रालय में निदेशक अभिषेक चौहान ने अपनी नई पुस्तक ‘उड़ चल अपने देश’ के माध्यम से अपने अनुभवों, सामाजिक अवलोकनों और सांस्कृतिक सरोकारों को अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है।
शहर के सर्किट हाउस में बुधवार को आईआरएस अधिकारी एवं रक्षा मंत्रालय में पदस्थ निदेशक अभिषेक चौहान ने प्रेसवार्ता आयोजित कर अपनी पुस्तक ‘उड़ चल अपने देश’ के संबंध में मीडिया से चर्चा की। इस दौरान उन्होंने पुस्तक की विषय-वस्तु और उसके उद्देश्य पर विस्तार से जानकारी दी।
अभिषेक चौहान ने बताया कि उनकी पुस्तक ‘उड़ चल अपने देश’ लोगों को अपनी जड़ों और मातृभूमि से जुड़े रहने का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि आज बड़ी संख्या में लोग रोजगार, व्यवसाय और अन्य कारणों से अपने क्षेत्र से दूर रहते हैं, लेकिन दूर रहकर भी अपने गांव, शहर और क्षेत्र के विकास एवं सेवा से जुड़े रहना संभव है। इसी सोच को पुस्तक में प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने बताया कि पुस्तक में पर्यावरणीय संकट, पलायन और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों को कथा के माध्यम से जोड़ा गया है। इसमें यह दर्शाने का प्रयास किया गया है कि यदि लोग अपनी जन्मभूमि और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाएं तो अनेक सामाजिक और पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान संभव है। पुस्तक में भविष्य में पर्यावरण की बदहाली और उससे उत्पन्न होने वाले अस्तित्व के संकट को पलायन जैसी सामाजिक समस्या से जोड़कर प्रस्तुत किया गया है। वहीं, इसके समाधान के रूप में घाटी की समृद्धि और विकास के लिए कथा के पात्रों को सच्चे प्रहरी के रूप में चित्रित किया गया है।अभिषेक चौहान ने यह भी बताया कि पुस्तक विशेष रूप से ब्रज, बुंदेलखंड और चंबल क्षेत्र की सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक परिस्थितियों पर आधारित है। चूंकि वे स्वयं चंबल अंचल के मूल निवासी हैं, इसलिए क्षेत्र की समस्याओं,संभावनाओं और यहां के लोगों के जीवन को पुस्तक में प्रमुखता से स्थान दिया गया है। उन्होंने कहा कि एक प्रशासनिक अधिकारी होने के साथ-साथ लेखन में उनकी रुचि का विषय रहा है। इसी उद्देश्य से उन्होंने यह पुस्तक लिखी है। ताकि लोगों में अपने क्षेत्र समाज और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़े तथा वे अपनी जड़ों से जुड़े रहने के लिए प्रेरित हों।
ग्रामीण भारत की बदलती तस्वीर, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के प्रति बढ़ती उदासीनता, पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता, मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियां और राष्ट्र निर्माण में आम नागरिक की भूमिका, ये सभी विषय अभिषेक चौहान की पुस्तक ‘उड़ चल अपने देश’ के केन्द्र में हैं। भारतीय राजस्व सेवा के आयुक्त स्तर के अधिकारी तथा वर्तमान में रक्षा मंत्रालय में निदेशक की भूमिका निभा रहे अभिषेक चौहान ने अपने अनुभवों, सामाजिक अवलोकनों और सांस्कृतिक सरोकारों को इस पुस्तक के माध्यम से अभिव्यक्त करने का प्रयास किया है। भिण्ड जिले में पालन-पोषण व प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त करने वाले अभिषेक चौहान का बचपन चंबल-यमुना दोआब के सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में बीता। प्रकृति, भारतीय दर्शन, ग्रामीण जीवन और सामाजिक चेतना उनकी इस पुस्तक के प्रमुख विषय हैं। लेखक का ग्रामीण परिवेश से जुड़ाव और भारतीय दर्शन के प्रति अनुराग पुस्तक के प्रत्येक अध्याय में महसूस होता है। ‘उड़ चल अपने देश’ विशेष रूप से युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत है। यह बताती है कि राष्ट्र सेवा केवल बड़े पदों या असाधारण कार्यों से नहीं, बल्कि छोटे-छोटे सकारात्मक प्रयासों से भी की जा सकती है।


