– स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता का सशक्त माध्यम है उद्यानिकी : जाट
– अटेर-भिण्ड ने संयुक्त रूप से सीएमसीएलडीपी विद्यार्थियों ने किया नर्सरी का शैक्षणिक भ्रमण
भिण्ड, 28 फरवरी। सीखने की ललक जब जमीन से जुड़ती है, तो नेतृत्व की नई दिशा जन्म लेती है। इसी उद्देश्य को साकार करते हुए मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास पाठ्यक्रम (सीएमसीएलडीपी) अंतर्गत विकासखण्ड अटेर एवं भिण्ड के संयुक्त छात्र-छात्राओं ने भिण्ड-इटावा रोड स्थित उद्यानिकी विभाग की नर्सरी का प्रेरणादायक शैक्षणिक भ्रमण किया। यह भ्रमण केवल पौधों को देखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि विद्यार्थियों ने प्रकृति, पर्यावरण संरक्षण और आत्मनिर्भरता के वास्तविक स्वरूप को समझा।
उद्यानिकी विभाग भिण्ड के जिला अधिकारी गंभीर सिंह तोमर द्वारा अधिकृत उद्यानिकी अधिकारी शंकर जाट ने विद्यार्थियों को फलदार, छायादार एवं औषधीय पौधों की उन्नत प्रजातियों, वैज्ञानिक रोपण तकनीकों, संरक्षण विधियों एवं नर्सरी प्रबंधन की व्यवहारिक जानकारी प्रभावशाली ढंग से प्रदान की। उन्होंने बीज चयन, कलम एवं ग्राफ्टिंग विधि, जैविक खाद उपयोग तथा कीट नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया।
उन्होंने कहा कि उद्यानिकी केवल पारंपरिक खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि यह युवाओं के लिए स्वरोजगार, आत्मनिर्भरता और पर्यावरण संरक्षण का सशक्त माध्यम है। यदि आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए तो कम संसाधनों में भी बेहतर आय और हरित विकास संभव है। उनके मार्गदर्शन से विद्यार्थियों में उद्यानिकी के प्रति नई ऊर्जा और जागरूकता का संचार हुआ।
मप्र जन अभियान परिषद के जिला समन्वयक डॉ. शिवप्रताप सिंह भदौरिया ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि नेतृत्व वही है जो समाज और प्रकृति दोनों के प्रति जिम्मेदारी निभाए। उन्होंने छात्रों को समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने के लिए प्रेरित किया। पर्यावरण संरक्षण आज केवल एक विषय नहीं, बल्कि सामाजिक आंदोलन का रूप ले चुका है। यदि युवा वर्ग आगे आए तो हर गांव, हर मोहल्ला हरित और आत्मनिर्भर बन सकता है।
उन्होंने कहा कि सीएमसीएलडीपी का उद्देश्य केवल शैक्षणिक डिग्री प्रदान करना नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाले जागरूक नेतृत्व का निर्माण करना है। इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण विद्यार्थियों को जमीनी स्तर की वास्तविकताओं से जोड़ते हैं और उन्हें व्यवहारिक ज्ञान प्रदान करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे केवल जानकारी तक सीमित न रहें, बल्कि पौधरोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता जैसे अभियानों में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
विकास खण्ड समन्वयक अटेर सोहन सिंह भदौरिया ने कहा कि आज का युवा यदि उद्यानिकी और पर्यावरण संरक्षण को अपनाए, तो आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। नवांकुर संस्था प्रमुख अतुलकांत शर्मा एवं परामर्शदाता अंकित धाकरे, आशीष शर्मा, शिवा राठौर, सरिता चौहान, सुमन भदौरिया, अवधेश शर्मा, नीरज शर्मा, रामभरत सहित विद्यार्थी उपस्थित रहे।
भ्रमण के दौरान विद्यार्थियों ने पौधशाला की संपूर्ण प्रक्रिया को नजदीक से देखा, पौध तैयार करने की तकनीकों को समझा और पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को महसूस किया। यह भ्रमण छात्रों के लिए ज्ञान, प्रेरणा और नेतृत्व विकास का सशक्त माध्यम सिद्ध हुआ। अंत में सभी विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लेते हुए अधिक से अधिक पौधरोपण करने और समाज में जागरूकता फैलाने का संदेश दिया।


