– अरुण गुप्ता की प्रेरक यात्रा इसका जीता-जागता प्रमाण
भिण्ड, 11 जनवरी। मप्र शासन के उद्यानिकी विभाग द्वारा संचालित एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना ने फल-सब्जी व्यापारियों की किस्मत बदल दी है। इस योजना के तहत कोल्ड स्टोरेज और राइपनिंग चैंबर निर्माण को बढ़ावा देकर न केवल उत्पादों की बर्बादी रोकी जा रही है, बल्कि आर्थिक सशक्तिकरण भी सुनिश्चित हो रहा है। भिण्ड जिले के अरुण गुप्ता की सफलता इसकी सबसे जीवंत मिसाल है। उन्होंने योजना का लाभ उठाकर औद्योगिक क्षेत्र मालनपुर में आधुनिक कोल्ड स्टोरेज और राइपनिंग चैंबर स्थापित किया, जिससे उनका व्यापार नई ऊंचाइयों पर पहुंच गया।
गुप्ता बताते हैं के मैंने 4995 मैट्रिक टन क्षमता वाला कोल्ड स्टोरेज बनवाया, जो पांच चैंबरों में विभाजित है। प्रत्येक चैंबर की क्षमता एक हजार मैट्रिक टन है। इसकी कुल लागत करीब 5 करोड़ 87 लाख 58 हजार रुपए आई, जिसमें उद्यानिकी विभाग भिण्ड से एक करोड़ 33 लाख 67 हजार रुपए का अनुदान मिला। इसके अलावा उन्होंने 300 मैट्रिक टन क्षमता वाला राइपनिंग चैंबर भी तैयार किया। यह चार चैंबरों में बंटा है, प्रत्येक की क्षमता 75 मैट्रिक टन। इसकी लागत 3 करोड़ 72 लाख 42 हजार रुपए रही, जिसमें 91 लाख 74 हजार रुपए का अनुदान प्राप्त हुआ।
इन सुविधाओं से गुप्ता के व्यापार में क्रांति आ गई। पहले मौसमी उतार-चढ़ाव और खराब स्टोरेज से भारी नुकसान होता था, लेकिन अब उत्पाद ताजा रहते हैं और बाजार मूल्य अधिक मिलता है। रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं। वे कहते हैं, योजना ने मेरी जिंदगी बदल दी। मप्र सरकार और उद्यानिकी विभाग का धन्यवाद। यह योजना शासन की दूरदर्शिता का प्रतीक है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत कर रही है। कई अन्य व्यापारी भी इससे लाभान्वित हो रहे हैं। यह कहानी साबित करती है कि सही सरकारी सहायता से सामान्य व्यक्ति असाधारण सफलता हासिल कर सकता है। एमआईडीएच जैसी योजनाएं न केवल किसानों-व्यापारियों को सशक्त बनाती हैं, बल्कि खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करती हैं।


