– समाज और संस्कृति से सशक्त राष्ट्र का निर्माण : डॉ. विनोद सक्सेना
– भाविप शाखा भिण्ड का काव्य पाठ से हुआ संस्कृति सप्ताह का समापन
भिण्ड, 31 दिसम्बर। भारत विकास परिषद शाखा भिण्ड द्वारा संस्कृति सप्ताह के समापन अवसर पर नगर के केजीएन गार्डन गांधी नगर में कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह आयोजन भारतीय संस्कृति, भाषा और साहित्य के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से किया गया, जिसमें नगर के प्रबुद्धजनों, साहित्य प्रेमियों, एवं गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यक्रम का वातावरण साहित्यिक और सांस्कृतिक गरिमा से परिपूर्ण रहा। कार्यक्रम का शुभारंभ भारतमाता एवं स्वामी विवेकानंद के छायाचित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. सुरेश बंसल एवं कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ विनोद सक्सेना ने की। प्रारंभ में कमलेश सैंथिया ने स्वागत भाषण पढ़ा।
मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश बंसल ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय सनातन परम्परा, संस्कृति की गरिमा और उपयोगिता हमारी सनातन संस्कृति की आत्मा है। इसके संरक्षण हेतु ऐसे आयोजनों की निरंतरता आवश्यक है, जिससे नई पीढ़ी संस्कृति की गरिमा और उपयोगिता को समझ सके। संस्कृति किसी एक दिन की धरोहर नहीं होती, यह पीढ़ियों की तपस्या, त्याग और चेतना का परिणाम है।
शाखा अध्यक्ष जयप्रकाश शर्मा ने कहा कि परिषद सामाजिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक क्षेत्र में निरंतर सक्रिय रहते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान दे रही है। भारत विकास परिषद वर्षों से सेवा, संस्कार और सहयोग के मूल मंत्र को लेकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन का कार्य कर रही है। संस्कृति सप्ताह के माध्यम से परिषद ने यह संदेश दिया है कि भौतिक विकास के साथ-साथ सांस्कृतिक और वैचारिक विकास भी उतना ही आवश्यक है। संस्कृत सप्ताह के दौरान आयोजित विभिन्न गतिविधियों की संक्षिप्त जानकारी दी गई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ. विनोद सक्सेना ने भारत विकास परिषद के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे साहित्यिक आयोजन समाज में सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करते हैं। संस्कृत सप्ताह के आयोजन को प्रशंसनीय बताते हुए कहा कि कवि सम्मेलन जैसे कार्यक्रम युवाओं को साहित्य की ओर आकर्षित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कविता जन-जन के हृदय तक पहुँचती है, तब वह परिवर्तन की शक्ति बन जाती है। यह हमें हमारी जड़ों से जोड़ती है और हमारी संस्कृति, भाषा और मूल्यों की रक्षा करती है। जब समाज और संस्कृति साथ चलते हैं, तभी सशक्त राष्ट्र का निर्माण होता है।
इस दौरान अंजुम मनोहर, डॉ. शशिबाला राजपूत, प्रदीप वाजपेयी (युवराज), डॉ. उमा राजौरिया, हसरत हयात, राइन अजनवी, हेमंत जोशी (नादान), सतेन्द्र राजावत कवियों द्वारा कविता पाठ किया गया। कवि सम्मेलन का संचालन अंजुम मनोहर ने किया। उन्होंने अपनी ओजपूर्ण वाणी और रोचक शैली से पूरे कार्यक्रम को बांधे रखा। सम्मेलन में आमंत्रित कवियों ने हिन्दी, उर्दू, स्थानीय भाषा में रचनाएं प्रस्तुत कर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कविताओं में देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, संस्कृति, नैतिक मूल्यों, पर्यावरण संरक्षण तथा मानवता जैसे विषयों को प्रमुखता से रखा गया।
प्रथम कवि ने भारत की गौरवशाली परंपरा और ऋषि-मुनियों की ज्ञान परंपरा का वर्णन किया। उनकी रचना में मधुरता और भावों की गहराई स्पष्ट रूप से झलक रही थी। इसके पश्चात कवियों ने समसामयिक विषयों पर व्यंग्य और ओजपूर्ण कविताएं प्रस्तुत कीं, जिन पर श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साहवर्धन किया। कवयित्री ने नारी सशक्तिकरण विषय पर सशक्त प्रस्तुति दी, जिसमें भारतीय नारी की शक्ति और संस्कारों का सुंदर चित्रण किया गया। उनकी कविता ने विशेषकर युवा वर्ग को गहराई से प्रभावित किया। कवि सम्मेलन में हास्य-व्यंग्य की भी भरपूर झलक देखने को मिली। हास्य कवि ने अपनी रचना के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों पर तीखा व्यंग्य किया, जिससे पूरा सभागार ठहाकों से गूंज उठा। हास्य के साथ-साथ उन्होंने सार्थक संदेश भी दिया, जो श्रोताओं के मन में लंबे समय तक स्मरणीय रहेगा।
कार्यक्रम का संचालन परिषद के सचिव राजमणि ने गया, समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए। इस अवसर पर रेखा भदौरिया, अजय बसेड़िया, कमलेश सैंथिया, अनिल शर्मा, राधामोहन चौबे, डॉ. साकार तिवारी, बीरेन्द्र जोशी, प्रेम शर्मा, विनोद दूरवार, अनिल शर्मा वकील, अशोक शर्मा, अश्वनी डंडोंतिया, मधु चौहान, डॉ. तोषेन्द्र मिश्रा, देवेश शर्मा सोनू, कुक्कू राठौड़, गुड्डू सरपंच, सरोज जोशी, ज्योति बौहरे, सपना दुवे, मंजू शर्मा सहित नगर के गणमान्य नागरिक, शिक्षाविदों, समाजसेवियों परिषद के पदाधिकारियों, सदस्यों ने सहभागिता की।


