भिण्ड, 23 दिसम्बर। प्रमुख सचिव, पशुपालन एवं डेयरी विभाग, मप्र शासन के चिन्हित कार्यक्रम हिरण्य गर्भा कार्यक्रम के अंतर्गत जिले में संचालित गौशालाओं को स्वावलंबी बनाने हेतु कार्य प्रारंभ किया जा चुका है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत गौशालाओं में शत प्रतिशत निकृष्ट सांडों का बधियाकरण करने, गौशालाओं में उपलब्ध मादा गायों में कृत्रिम गर्भाधान के माध्यम से नस्ल सुधार कार्य प्रस्तावित है, ताकि गौशालाओं में दुग्ध उत्पादन में वृद्धि हो सके जो कि स्वावलंबन के लिए पहला कदम होगा। इसके साथ ही गौशालाओं में उपलब्ध चरनोई भूमि पर हरा चारा विकास योजना अन्तर्गत पौष्टिक चारे की खेती की जाए जो कि गौशालाओं के गौवंश के लिए उत्तम आहार होगा।
इसी कड़ी में पशुपालन एवं डेयरी विभाग, जिला भिण्ड मप्र द्वारा 22 दिसंबर को गौशाला संचालकों की कार्यशाला आयोजित कर, हरे चारे के मिनी किट एवं नस्ल सुधार कार्यक्रम हेतु पशु कटघरा प्रदाय किए गए। जिले की 35 गौशालाओं को चारा मिनी किट एवं 18 गौशालाओं को पशु ट्रेविस प्रदाय किए गए। उप संचालक पशुपालन एवं डेयरी विभाग भिण्ड ने बताया कि इसके साथ ही सभी संचालित गौशालाओं में आगामी 3 माह में शिविरों के माध्यम से बधियाकरण का कार्य संपादित किया जाएगा।
Friday, August 7
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