– सांझी शहादत साझी विरासत स्वाधीनता संग्राम का संदेश
भिण्ड, 20 दिसम्बर। देश को अंग्रेजों से आजादी मांगने से नहीं सांझी शहादतें देने से मिली है। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, सभी धर्मों के लोगों ने शहादत दी, एक साथ फांसी के फंदो को हंसते हंसते चूमा, तो अंग्रेजो की बंदूकों की गोलियां सीने पर देशवासियों ने झेली थी, विभिन्नता में एकता भारतीय संस्कृति की विशेषता थी, साझा संस्कृति की रक्षा करते हुए स्वाधीनता संग्राम में महान क्रांतिकारी रामप्रसाद बिस्मिल गोरखपुर, अशफाक उल्ला खां फैजाबाद, रोशन सिंह नैनी इलाहाबाद, 17 दिसंबर को राजेन्द्र नाथ लाहिड़ी गोंडा 4 क्रान्तिकारी, 4 शहर, 4 जेल में अलग-अलग फांसी दी गई थी। चारों स्वाधीनता संग्राम सेनानियों की अंतिम इच्छा थी कि हमें एक साथ एक जेल में फांसी दी जाए, लेकिन अंग्रेजों ने उनकी वह इच्छा पूरी नहीं की। आजाद भारत में चारों क्रांतिकारी की एक साथ शहादत मनाकर उनके विचारों का अनुशरण कर प्रचार प्रसार कर सकते हैं, तभी स्वाधीनता आंदोलन के महानायकों की आत्मा को शांति मिलेगी और भारतीय संस्कृति एवं संविधान की रक्षा करते हुए आजादी को अक्षुण्ण बना सकते। यह बात विद्यालयीन शिक्षक संघ के संभागीय संयोजक परषोतम श्रीवास ने राजहोली में पर स्मृति बैठक में कही। जिसकी अध्यक्षता सीटू जिला अध्यक्ष विनोद सुमन ने की।
सीटू जिला महासचिव अनिल दौनेरिया ने कहा कि देश के स्वाधीनता आंदोलन के क्रांतिकारियों से अंग्रेजी सरकार डरती थी, बल्कि आजादी के बाद देश में जो सरकार बनी वह भी डरती है, क्योंकि देश की सरकारों ने क्रांतिकारियों को वह सम्मान नहीं दिया जो आजादी के आंदोलन के वाद सत्ता में आए नेताओं को मिला, पाठ्यक्रमों से क्रांतिकारियों के विचार त्याग बलिदान को हटाया जा रहा है।
खेत मजदूर यूनियन के जिला संयोजक नरेन्द्र सिंह सेंगर ने कहा कि शहीदों को याद करना समाज की जिम्मेदारी है, सरकार तो भूलाने में लगी है, वह देश को आजाद कराने के लिए शहादत दी न कि सत्ता प्राप्त करने के लिए। सीटू जिला सचिव डॉ. नदीम ने कहा कि वह भी सता सुख पा सकते थे यदि थोड़ा समझौता कर लेते, लेकिन उन्होंने देशहित में प्राणों को न्यौछावर करना चुना। इसलिए 98 साल बाद भी श्रद्धा सुमन अर्पित कर स्मरण कर रहे हैं।
कवि शिक्षक राधाबल्लभ बाजपेई ने कविता पाठ करते हुए कहा क्रांतिकारी का सपना था- इस भारत वर्ष में सत बार मेरा जन्म हो, कारण सदा ही मृत्यु का देशोंपकारक कर्म हों। जो शहीद हुए हैं वतन पर, याद उन्हें भी कर लेना, गोरों ने उनको मारा था। हमेशा याद कर जिंदा करते रहेंगे। इसी भावना के साथ कार्यक्रम स्थगित किया गया। कार्यक्रम में शिवम राठौर, अनिकेत वर्मा, राघव बाथम, गौरव कुशवाहा, प्रदीप श्रीवास, अमित बघेल, हरीश ओझा, गुरमीत श्रीवास, किशन सिंह भदौरिया, कृष्णा बाथम, लखन श्रीवास, विशाल कुशवाहा, सिद्धार्थ श्रीवास, हिमांशु राठौर, अनीश खान, प्रदीप श्रीवास, सुमित राठौर, पिंटू शर्मा, प्रियांशु राठौर, राम श्रीवास आदि उपस्थित रहे।


