भिण्ड, 01 दिसम्बर। मालनपुर के वार्ड क्र.तीन में चल रही सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का सोमवार को समापन हुआ। कथा के अंतिम दिन कथा वाचक कान्हाजी महाराज ने सुदामा और भगवान कृष्ण की लीला का वर्णन किया गया।
कथा वाचक ने कहा कि सुदामा एक गरीब ब्राह्मण थे, जो अपने परिवार के साथ एक छोटे से गांव में रहते थे। वह भगवान कृष्ण के बचपन के मित्र थे और उनकी मित्रता बहुत गहरी थी। लेकिन समय के साथ, सुदामा की आर्थिक स्थिति खराब हो गई और वह अपने परिवार का पालन-पोषण करने में असमर्थ हो गए। एक दिन सुदामा की पत्नी ने उन्हें कृष्ण से मिलने और उनकी मदद मांगने के लिए कहा। सुदामा ने पहले तो मना किया, लेकिन पत्नी के आग्रह पर वह कृष्ण से मिलने के लिए तैयार हो गए। सुदामा कृष्ण से मिलने के लिए द्वारका गए, जहां कृष्ण राजा थे। जब सुदामा कृष्ण के महल में पहुंचे, तो कृष्ण को उन्हें देखकर बहुत खुशी हुई और उनका स्वागत किया। कृष्ण ने सुदामा से उनके आने का कारण पूछा, तो सुदामा ने अपनी गरीबी और आर्थिक स्थिति के बारे में बताया। कृष्ण ने सुदामा की बात सुनकर उन्हें आश्वस्त किया कि वह उनकी सभी समस्याओं का समाधान करेंगे। कृष्ण ने सुदामा को अपने महल में रहने के लिए कहा और उनकी सभी जरूरतों का ध्यान रखने के लिए कहा। कृष्ण ने सुदामा को एक पोटली में कुछ चावल दिए और कहा कि यह उनकी मित्रता का प्रतीक है। सुदामा वह चावल लेकर अपने घर वापस आ गए। जब उन्होंने वह चावल अपनी पत्नी को दिए तो वह बहुत खुश हुई और कहा कि कृष्ण ने उनकी सभी समस्याओं का समाधान कर दिया है। सुदामा के घर वापस आने के बाद कृष्ण की कृपा से उनके घर में धन-धान्य की वर्षा होने लगी और वह एक समृद्ध जीवन जीने लगे। इस अवसर पर कथा परीक्षित महेश शर्मा उर्फ पप्पू पंडित, डॉ. राघवेन्द्र दुबे, सुरेन्द्र कांकर, मुनेन्द्र शर्मा, दीवान सिंह गुर्जर, बादशाह गुर्जर एवं नगरवासी क्षेत्रवासी मौजूद रहे।
Friday, May 29
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