-अविवाहित वीके के निजी धारावाहिकों को फिल्मों के बड़े पैमाने पर नहीं देखा जा सकता
नई दिल्ली, 09 जून। सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि दो ब्रह्मचारी के बीच विचारधारा की सहमति से शारीरिक संबंध किसी व्यक्ति के चरित्र पर सवाल उठाने का आधार नहीं हो सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति के नैतिक चरित्र के बारे में इस तरह की निजी मान्यता का आधार नहीं बनाया गया है। जस्टिस केस और जस्टिस मनोज मिश्रा की पीठ ने यह टिप्पणी तेलंगाना राज्य पुलिस भर्ती बोर्ड से जुड़ी एक सुनवाई के दौरान की।
कोर्ट ने कहा कि भारतीय कानून दो ब्रह्मचारी पर सहमति से संबंध बनाने से लेकर फिल्मों और इस तरह के आचरण को नैतिक पतन का प्रमाण नहीं माना जा सकता है। मामला एक ऐसे दावेदार से हटा दिया गया था, जिसका चयन पुलिस कांस्टेबल पद के लिए हुआ था, लेकिन उसके खिलाफ दर्ज एक पुराने आपराधिक मामले में जमानत रद्द कर दी गई थी। भर्ती बोर्ड का तर्क था कि प्रतियोगी के खिलाफ मामला उसके नैतिक आचरण पर प्रश्नचिन्ह लगाया गया है। हालांकि, सर्वोच्च न्यायालय ने इस दृष्टिकोण को स्वीकार नहीं किया और अभ्यर्थी की दलील पर रियाज के निर्देश दिए जाने वाले उच्च न्यायालय के आदेश को मंजूरी दे दी गई। कोर्ट ने कहा कि हर प्रेम संबंध का विवाह में दोबारा होना जरूरी नहीं है। केवल इसलिए कि कोई भी रिश्ता विवाह तक न पहुंचे, यह व्यक्ति किसी एक पक्ष द्वारा दूसरे के साथ धोखा नहीं करता है। पृथिवी ने कहा कि स्वत: के स्वामित्व को आपराधिक या अपमानजनक नहीं माना जा सकता। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ कर दिया कि शादी का वादा तलाक से जुड़े मामले में लोक अदालत के समक्ष समझौता अपराध स्वीकार करने के समान नहीं है। यदि अभिलेख में यह साक्ष्य नहीं है कि समझौते में तनाव, खतरनाक या बल की कमी हो गई है, तो उसके आधार पर किसी भी दावेदार के विपरीत निष्कर्ष को हटाया नहीं जा सकता है। मामले में अदालत ने पाया कि उम्मीदवार और नौकर पड़ोसी थे और लगभग चार साल तक उनके बीच संबंध रहे थे। बाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया और मामला लोक अदालत में समाप्त हो गया। कोर्ट ने कहा कि आपराधिक न्याय प्रणाली का मूल सिद्धांत यह है कि जब तक अदालत में आरोप सिद्ध नहीं हो जाता, तब तक व्यक्ति को असंगत माना जाता है। सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी व्यक्तिगत स्वतंत्रता, निजता और सहमति के आधार पर संबंध में एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक दृष्टिकोण के रूप में विचार की जा रही है।


