– फूप में हुआ तीन वेदी का शिलान्यास
भिण्ड, 11 जून। जीवन में व्यक्ति को कब किस प्रतिमा के निमित्त से वैराग्य हो जाए इस लिए हर व्यक्ति को प्रतिमा दर्शन करते रहते चाहिए। जिससे व्यक्ति का कल्याण हो सके, कभी भी यह नहीं सोचना चाहिए कि इन प्रतिमाओं का क्या होगा। यह विचार पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने फूफ दिगम्बर जैन नसिया मन्दिर में हो रहे नवनिर्मित तीन वेदी के शिलान्यास के समय व्यक्त किए।
पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज भिण्ड से कल पद बिहार करते हुए फूप जैन मन्दिर पहुंचे, जहां पर जैन समाज द्वारा महाराज का स्वागत एवं पाद प्रक्षालन किया गया एवं महाराज ने नसिया मन्दिर प्रांगण में नवनिर्मित तीन वेदी का शिलान्यास किया। तदुपरांत महाराज पद विहार करते हुए बरही जैन मन्दिर में पहुंचे, जहां पर बरही समाज द्वारा उनका स्वागत एवं पाद पक्षालन किया गया।
पट्टाचार्य ने मन्दिर में प्रतिमाओं के दर्शन कर धर्मशभा में कहा कि यह प्रकृति का नियम है, व्यक्ति जिस वस्तु अथवा आकांक्षा में भटक रहा है और वह वस्तु या आकांक्षा उसे प्राप्त नहीं होती, लेकिन जैन सिद्धांत यह कहता है कि यदि जो वस्तु तुम्हें प्रिय हो और वह आपको प्राप्त नहीं होती तो उस वस्तु अथवा आकांक्षा को ही त्याग देना चाहिए और देखना कुछ समय पश्चात वही वस्तु आपको अपनी ओर आकर्षित करने लगेगी। इसी प्रकार यदि भगवान बनना है तो जगत के संपूर्ण प्रपंचों से दूर हो जाओ, जगत को प्रभावित करना चांहते हो तो जगत से प्रभावित होना छोड़ दो। भगवान बनना है तो पहले महात्मा बनो और जगत में यदि कोई सुख है तो वह आत्मसुख है। क्योंकि सभी विकल्पों को छोड़कर जो सुख बचता है, वही सच्चा निर्विकल्प सुख होता है।
महाराज ने कहा कि व्यक्ति को सदैव कषाय मुक्त रहना चाहिए, क्योंकि कषाय एक कलंकित होकर ऐसी कणिका है, जो व्यक्ति के जीवन को ही नष्ट कर देेती है। संसार में क्रोध, मान, माया और लोभ ऐसी चार कषाय हैं जिनका पूरी तरह से त्याग रहित जीवन जीना चाहिए, ये चारों कषाय आग की भट्टी की तरह सदैव जलती रहती है और प्रतिक्षण जीव उसमें जल रहा है और ऐसी भट्टी से जब तक जीव निज और पर का भेद नही करेगा, तब तक उसमें जलता ही रहेगा। इसलिए हमें इससे बचना चाहिए।
पट्टाचार्य का शाम को हुआ इटावा की ओर पदबिहार
मीडिया प्रभारी रिषभ जैन के बताया कि पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने संघ सहित बरही से शाम को इटावा की ओर मंगल बिहार किया। जिसमें रास्ते में चंबल तट पर उन्होंने महामृत्युंजय तीर्थ क्षेत्र के दर्शन करते एवं शाम को इटावा की ओर जैन मन्दिर नसिया में रात्रि विश्राम कर कल सुबह इटावा में प्रवेश होगा। जिसमें इटावा के श्रद्धालुजन महाराज के आगवानी की तैयारी कर रहे हैं। फूफ में आचार्यश्री का पाद प्रक्षालन उनके ही ग्रहस्थ अवस्था के भाई महेश जैन ने किया।


