भिण्ड, 10 जून। पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज के ससंग सानिध्य में चल रहे पंच कल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव के समापन के अवसर पर बुधवार को आदिनाथ (ऋषभदेव) भगवान को कैलाश पर्वत से निर्माण की प्राप्ति हुई अग्नि कुमार देवों द्वारा नखा केस संस्कार एवं प्रतिष्ठा आचार्य अभिषेक शास्त्री एवं आशीष शास्त्री द्वारा विधि विधान से पूजन की क्रियाएं कराई गई। तत्पश्चात रथ पर सवार होकर भगवान की शोभायात्रा पंडाल के चारों ओर निकाली गई।
इस अवसर पर पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज ने धर्मसभा में कहा कि पंचकल्याण के अंतिम दिन हम सभी ने भगवान आदिनाथ की जीवन की गर्भ से लेकर मोक्ष तक की क्रियायों को देखा जाना और समझा। उन्होंने कहा कि जो बीज जल जाता है वह कभी अंकुरित नहीं होता, अंकुर जो दिखते हैं अन्य बीज के अंकुर होते हैं। इस प्रकार परमात्मा आश्रित भगवान, शरीर युक्त होकर संसार में आकर कर्मों से लिप्त नहीं होते। जैसे स्वच्छ वस्त्र धारण करने वाला कौन समझदार पुरुष मालिन वेस्टन को धारण करेगा, परमात्मा शरीरों को धारण नहीं करता, वह जन्म मृत्यु से शून्य है।
पट्टाचार्य ने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का कर्तव्य है कि वह स्वयं पर के जीवन की कीमत को समझे। मानव जीवन की प्राप्ति कठिन ही नहीं अत्यंत दुर्लभ है। 84 लाख योनियों में सर्वश्रेष्ठ मानव जीवन है। यह खेलकूद से प्राप्त नहीं हुई है जब जीव महा साधना करता है तब मानव देह मिलती है, इसे बेकार मत करो।
पट्टाचार्य का लखनऊ के लिए हुआ बिहार
पट्टाचार्य विशुद्ध सागर महाराज सत्संग का मंगल विहार निराला रंग बिहार से उत्तर प्रदेश लखनऊ के लिए हुआ। जो शाम 5 बजे भिण्ड से पद विहार करते हुए फूप पहुंचें एवं 11 जून को अतिशय क्षेत्र बरही जैन मन्दिर में उनका स्वागत होगा। इस अवसर पर विधायक नरेन्द्र सिंह कुशवाह, अन्नू तोमर, विनोद जैन, रविसेन जैन, पार्षद मनोज जैन, यश जैन, बिट्टू जैन, सचिन जैन, पंकज जैन, बॉबी जैन, देवेन्द्र जैन, मोहन जैन, विवेक जैन टीटू आदि उपस्थित थे।
Saturday, June 13
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