भिण्ड, 28 मई। ग्राम बिरधनपुरा में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में 22 वर्षीय कथा वाचक अभिषेक उपाध्याय ने कथा प्रसंग में भगवान श्रीकृष्ण की 7 वर्ष की आयु में की गई लीला के बारे में बताया।
भगवताचार्य अभिषेक उपाध्याय ने बताया कि एक समय ब्रजभूमि में सभी गोकुलवासी देवराज इन्द्र की पूजा किया करते थे, उनका विश्वास था कि इन्द्र देव वर्षा करते हैं, जिससे अन्न और जीवन संभव होता है, तब बाल स्वरूप में भगवान श्रीकृष्ण ने नंद बाबा और समस्त बृजवासियों से कहा कि हमें इन्द्र की नहीं बल्कि गोवर्धन पर्वत, गौ माता और प्रकृति की पूजा करनी चाहिए, क्योंकि वह हमारे जीवन का पालन करते हैं, तब भगवान श्रीकृष्ण के समझाने पर सभी बृजवासियों ने इन्द्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन की पूजा करना शुरू कर दी, इसको देखते हुए देवराज इन्द्र बहुत क्रोधित हुए, उन्होंने अपने अहंकार में आकर ब्रजभूमि पर भयंकर वर्षा और तूफान भेज दिया, इन्द्र देवता का रौद्र रूप देखकर लोग भयभीत हो गए, गौ माता व्याकुल होने लगी और पूरा गोकुल संकट में पड़ गया, तब केवल 7 वर्ष की आयु में भगवान श्रीकृष्णा अपनी छोटी उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत उठा लिया, यह अद्भुत लीला देखकर इन्द्र देवता का अहंकार टूट गया, उन्हें अपनी भूल का ऐहसास हुआ और भगवान श्रीकृष्ण के चरणों में जाकर क्षमा मांगने लगे। भगवताचार्य उपाध्याय ने बताया कि हमें कभी अभिमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि अभिमान मनुष्य का ही नहीं देवताओं का भी पतन कर सकता है।
Saturday, May 30
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