– बाबा पाण्डरी धाम परिसर में देवी भागवत कथा में हो रहे प्रवचन
भिण्ड, 08 मई। जिले के ग्राम सगरा स्थित बाबा पाण्डरी धाम परिसर में चल 21 कुण्डीय होमात्मक सहसचण्डी महायज्ञ के दौरान चल रही देवी भागवत कथा के पंचम दिवस देवी भागवत कथा में व्यास दण्डीस्वामी महाराज ने रामचरित मानस प्रसंगों पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि अयोध्या के कई प्र यात राजाओं के प्रसंग क्रम में राजा ध्रुवसंधि के पुत्र सुदर्शन एवं राजा सुबाहु की पुत्री शशिकला के विवाह, राजा बलि को छलने आये भगवान वामन की कथा का बखान किया। कथा व्यास ने सीता और सूर्पनखा की भावना का वर्णन करते हुए बताया कि यह दोनों देवियों की एक ही राशी है, दोनों भगवान से प्रेम करतीं हैं। दोनों रामजी को पाना चाहतीं हैं, किन्तु एक को राम का प्रेम एवं स मान मिलता है वहीं दूसरी को दण्ड एवं अपमान मिलता है ऐसा क्यों?
मानस पुरुष राजीव गुरुजी ने बताया कि किसी कन्या के द्वारा पवित्र प्रेम करना कोई गलत कार्य नहीं, उस पर भगवान से प्रेम करना तो कतई गलत नहीं, लेकिन दोनों की मानसिकता विपरीत है, सीता उपासना हेतु राम को चाहती हैं और सूपर्णनखा वासना हेतु। सीता का राम से प्रेम दृढ़ है वहीं सूपर्णनखा का प्रेम चंचल है, वह चाहतीं है यदि राम ना मिलें तो लक्ष्मण ही सही। सीता ने कुंआरे राम से प्रेम किया किन्तु पिता के मान का, मर्यादा का, उनकी प्रतिज्ञा का पूरा ध्यान रखा और अपनी मनोकामना को देवी सती को समर्पित करके दैवीय सहायता प्राप्त कर सफलता प्राप्त की, किन्तु सूर्पनखा ने विवाहित राम से प्रेम करना चाहा और अपने भाई, पिता, कुल को कलंकित कर स्वयं प्रणय निवेदन करने पहुंचीं, परिणाम में स्वयं का अपमान और समस्त कुल का विनास करवा दिया।


