– श्रीमद् भागवत कथा में उमड़ा जन सैलाब
भिण्ड, 27 अप्रैल। मिहोना के पास ररी गांव में गौड़ बाबा प्रांगण में अयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस कथा वाचक हेमंतकृष्ण शास्त्री महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान अपने सखाओं के साथ गेंद से खेल रहे थे, खेलते-खेलते उस गेंद को कालीदह कुण्ड में फेंक देते है, जिसे उठाने के लिए वह उस कुण्ड में कूद जाते है और कालीदह के पास पहुंच कर उसकी पूंछ पर अपना पेर रख देते हैं जिससे वह जाग जाते है तो शेशनाग को पकड़ते इससे पहले वह नाग उन्हें जकड़ लेता है, तो वहां भगवान अपना शरीर बढ़ा देते हैं, जिससे वह टूट जाता है और वह उनके फन पर पहुंच कर नृत्य करने लगते है और उससे कहते है यहां से चले जाने के लिए कहा। तो कालीनाग बोले प्रभु में कहां जाऊं, उधर जाऊंगा तो मुझे गरुण जी मार डालेंगे, इससे अच्छा हैं प्रभु आप ही मुझे मार दीजिए जिससे मेरी मुक्ति हो जाएगी।
तब भगवान जी कहते है आप वहां जाओ अब मेरी चरण धूली लग गई अब तुम्हें कोई नुकसान नहीं होगा। प्रभु मैं यहां इसलिए रह रहा था क्योंकि इस जगह पर सौभरि ऋषि महाराज जल में बैठ कर तपस्या कर रहे थे, उस दौरान वहां पर मछलियों को गरुड़ खा रहे थे, जब सौभरि ऋषि महाराज ने उन्हें मछली खाने से रोकते है और वह नहीं मानते, तब जल में तपस्या कर रहे सौभरि ऋषि महाराज क्रोधित होकर उन्हें श्राप देते है कि तुम इन्हें खाओगे तो तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी, इसलिए में यहां था। तब भगवान जी कहते है अब वहां जाओ तुम्हें गरुण कोई नु$कसान नहीं पहुंचा पाएंगे। इसके बाद नंद बाबा इन्द्र देव की पूजा करने की तैयारी कर रहे थे तब लाला बाबा से कहते है कि बाबा गिर्राज धरण की पूजा करते है और गौवर्धन पूजा छप्पन भोग लगाकर विधी बिधान से पूजा करते हैं, जिससे नाराज होकर इन्द्र देव ने मेघ वर्षा की, जिससे भीषण बारिश हुई, तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपनी उंगली पर उठा लिया और सभी ब्रिजवासी गोवर्धन पर्वत के नीचे आ जाते हैं और छीरश्री महाराज गोवर्धन के आस-पास बेठ जाते हैं, जिससे जल अंदर नहीं आए, लगातार सात दिन बारिश होने के बाद इन्द्र देव का घमण्ड टूट जाता है, वह भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुंच कर उनसे क्षमा मांगने लगते हैं, तब भगवान उन्हें माफ कर देते हैं। इस दौरान कथा परीक्षित सूरज प्रसाद शर्मा व भारी संख्या में श्रोतागण उपस्थित रहे।


