भिण्ड, 08 जून। डांक बंगला सरकार मेहगांव में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन कथा व्यास आचार्य सत्यम दुबे शास्त्री ने कहा जहां प्रेम हो, वहां प्रभाव या ऐश्वर्य का प्रदर्शन नहीं होना चाहिए, वहां केवल प्रेम ही दिखाई देता है। श्रीकृष्ण और ब्रजवासियों के विरह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन करते समय कथावाचक भावुक हो गए, पंडाल में मौजूद अनेक श्रद्धालुओं की आंखें भी नम हो गईं।
पुरुषोत्तम मास के अवसर पर मेहगांव में आयोजित कथा पर आचार्य सत्यम दुबे शास्त्री ने ब्रजवासियों और भगवान श्रीकृष्ण के प्रेम का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि प्रेम में व्यक्ति को केवल अपने आराध्य का स्वरूप दिखाई देता है। प्रेमी के लिए संसार की हर वस्तु प्रेममय हो जाती है। कथावाचक ने श्रीकृष्ण के मथुरा गमन का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि जब कंस वध के लिए कान्हा मथुरा जाने लगे तो ब्रजवासियों ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। सभी के आग्रह पर श्रीकृष्ण ने शीघ्र लौटने का आश्वासन दिया, लेकिन उनके जाने से पूरा ब्रज विरह में डूब गया। उन्होंने कहा कि राधा और मीरा के विरह का वर्णन तो अक्सर सुनने को मिलता है, लेकिन श्रीकृष्ण के विरह की चर्चा बहुत कम होती है। श्रीकृष्ण भी अपनी माता यशोदा, ग्वाल बालों और ब्रजवासियों को याद कर व्याकुल होते थे। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण भले ही मथुरा और द्वारका गए हों, लेकिन उनका मन हमेशा वृंदावन में ही रहा। यशोदा और श्रीकृष्ण के वियोग प्रसंग का वर्णन करते समय पंडाल का वातावरण भावुक हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की आंखों से आंसू छलक पड़े और पूरा परिसर भक्ति रस में डूब गया।
Wednesday, July 29
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