– श्रीमद् भागवत कथा में भगवान के बाल चरित्र के चित्रण व गोवर्धन पूजा में उमड़ा जन सैलाब
भिण्ड, 20 मई। जिले के नगर मिहोना की बड़ी माता मन्दिर प्रांगड़ में अयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पंचम दिवस कथा वाचक राघवेन्द्र महाराज ने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीला की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान अपने शखाओं के साथ गेंद से खेल रहे थे, खेलते खेलते उस गेंद को कालीदह कुंड में फेंक देते हैं, जिसे उठाने के लिए वह उस कुण्ड में कूद जाते हैं और कालीदह के पास पहुंच कर उसकी पूंछ पर अपना पेर रख देते हैं और वह जाग जाते है तो शेशनाग को पकड़ते, इससे पहले वह नाग उन्हें जकड़ लेता हैं, तो वहा भगवान अपना शरीर बढ़ा देते हैं, जिससे वह टूट जाता है और वह उनके फन पर पहुंच कर नृत्य करने लगते हैं और उससे कहते हैं कि यहां से चले जाओ, तो काली नाग बोले प्रभु मैं कहां जाऊं, उधर जाऊंगा तो मुझे गरूण जी मार डालेंगे, इससे अच्छा हैं प्रभु आप मुझे मार डालो, जिससे मेरी मुक्ति हो जाएगी, तब भगवान जी कहते हैं आप वहां जाओ अब मेरी चरण धूली लग गई अब तुम्हें कोई नुकसान नहीं होगा। प्रभु मैं यहां इसलिए रह रहा था क्योंकि इस जगह पर शोभरि ऋषि महाराज तपस्या कर रहे थे, उस दौरान वहां पर मछलियों को गरुड़ जी खा रहे थे, जब शोभरि ऋषि महाराज ने उन्हें मछली खाने से रोकते है और वह नहीं मानते, तब जल में तपस्या कर रहे शोभरि ऋषि महाराज क्रोधित होकर उन्हें श्राप देते है कि तुम इन्हें खाओगे तो तुम्हारी मृत्यु हो जाएगी, इसलिए अब वहां जाओ तुम्हें गरुण जी कोई नुकसान नहीं पहुंचा पाएंगे। इसके बाद नंद बाबा इंद्र देव की पूजा करने की तैयारी कर रहे थे तब लाला बाबा से कहते है कि बाबा गिर्राज धरण की पूजा करते है और गौवर्धन पूजा छप्पन भोग लगाकर विधी बिधान से पूजा करते हैं, जिससे नाराज होकर इन्द्र देव ने मेघ वर्षना की, जिससे भीषण बारिश हुई, तब भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत अपनी उंगली पर उठा लिया और सभी ब्रजवासी गोवर्धन पर्वत के नीचे आ जाते है और छीरश्री महाराज गोवर्धन के आस-पास बेठ जाते हैं, जिससे जल अंदर नहीं आए लगातार सात दिन बारिश होने के बाद इन्द्र देव का घमण्ड टूट जाता है वह भगवान श्रीकृष्ण के पास पहुंच कर उनसे क्षमा मांगने लगते हैं, तब भगवान उन्हें माफ कर देते हैं। कथा के दोरान कथा परीक्षित ममता अशोक पचौरी व श्रोतागण उपस्थित रहे।


