-ग्राम सगरा स्थित बाबा पाण्डरी धाम परिसर में देवी भागवत कथा में हो रहे प्रवचन
भिण्ड, 06 मई। जिले के ग्राम सगरा स्थित बाबा पाण्डरी धाम परिसर में चल 21 कुण्डीय होमात्मक सहसचण्डी महायज्ञ के दौरान चल रही देवी भागवत कथा के तृतीय दिवस समर्थजी ने व्यासपीठ से ज्ञानवर्धक, भक्तिवर्धक प्रसंग सुनाए। उन्होंने विशेषकर व्यासपुत्र शुकदेव के उच्च चरित्र का वर्णन करते हुए राजा जनकजी के देही होते हुए कैसे विदेह जीवन जीते थे, ऐसा अद्भुत प्रसंग सुनाया।
कथा क्रम में पधारे डॉ. गुनप्रकाश ने बताया कि जीवन में यदि अर्थ धर्म काम एवं मोक्ष प्राप्त करना है, तो हमें सर्वप्रथम दैनिक क्रियाओं को व्यवस्थित करना ही पड़ेगा। यदि मनुष्य बृह्म मुहूर्त अर्थात सुबह चार बजे ना जागकर दस बजे जागता है तो वह व्यक्ति जीवन के चारों लक्ष्यों में से एक को भी पूर्ण रूप से प्राप्त नहीं कर सकता। यज्ञाचार्य वशिष्ठजी ने यज्ञ से प्राप्त होने वाले लौकिक एवं पारलौकिक लाभ की शास्त्रीय व्याख्या को सभी श्रोताओं को सुनाकर अभिभूत कर दिया।
अयोध्याधाम से आये मानस-पुरुष उपाधिप्राप्त राजीव गुरूजी ने कथा के उपरान्त सुन्दर कथा समीक्षा प्रस्तुत की। यज्ञ स्थल पर काशीजी की आरती की प्रस्तुति अद्भुत, अनुपम एवं अति मनमोहक रही। कथा श्रवण करने क्षेत्र से पधारे हजारों भक्तों ने मुक्त कण्ठ से आयोजन की भूरि-भूरि प्रशंसा की।


