– राकेश अचल
हमारे देश का सौभाग्य है कि देश का प्रधानमंत्री सियासत को झाल मुड़ी तक ले आया। दिमाग के बजाय प्याज खाने के शौकीन पंत प्रधान को बंगाल में एक दुकानदार से 10 रुपए की झाल मुड़ी खरीदते देख मुझे बहुत खुशी हुई। लोकसभा में महिला आरक्षण देने के लिए नया परिसीमन कराने हेतु 131वां संविधान संशोधन विधेयक पारित कराने में नाकाम प्रधानमंत्री को झाल मुड़ी खाना उनकी मजबूरी भी थी और जरूरी भी। उनके भीतर कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी और सपा के लिए जो कड़वाहट भरी थी, उसे बंगाली झालमुड़ी ही समाप्त कर सकती है।
बंगाल जीतना भाजपा का, मोशा का बहुत पुराना सपना है। इसी के लिए हमारी सरकार संविधान संशोधन करना चाहती थी, भाजपा की बदनसीबी कि ऐसा नहीं हो पाया। संविधान संशोधन के लिए दो तिहाई बहुमत मिलना कठिन नहीं था, क्योंकि जो सदन महिला आरक्षण विधेयक को सर्व सम्मति से पारित करा सकता था, वो संविधान संशोधन भी करा सकता था, लेकिन लोकसभा को भरोसे में लिया ही नहीं गया।
मजे की बात देखिए कि अभिनय सम्राट हमारे पंत प्रधान जिस दुकान पर झाल मुड़ी खाने पहुंचे वो भी एक साहू की थी। यानि यहां भी साहिब ने सजातीय ही खोजा। खोजबीन का विषय ये भी है कि पंत प्रधान के पास फुटकर रुपए कहां से आए? क्योंकि साहब तो कभी सब्जी-भाजी या राशन लेने जाते नहीं। आप कहेंगे कि ये तो छिद्रान्वेषण है! जी बिल्कुल है। हमें यही करना सिखाया गया है। हम इसी उदाहरण से ये समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि झाल मुड़ी पॉलिटिक्स एक स्क्रिप्टिड राजनीतिक एपीसोड है। बंगाल जीतने के लिए पहली बार केन्द्र सरकार केंचुआ के अलावा अर्ध सैनिक बलों का भी निर्लज्ज इस्तेमाल कर रही है। पिछले दिनों असम में मतदान के लिए केंचुआ को उन तमाम इंतजामों की जरूरत नहीं पड़ी जो अब 23 अप्रैल को होने वाले मतदान के लिए किए गए हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री की धमकियों से लग रहा है कि बंगाल जीतने के लिए भाजपा सभी इंतजाम कर चुकी है, केवल नतीजों का औपचारिक ऐलान करना ही बांकी है।
आपको बता दें कि निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के 152 निर्वाचन क्षेत्रों में 23 अप्रैल को होने वाले पहले चरण के चुनाव के दौरान स्वतंत्र व शांतिपूर्ण मतदान के नाम पर कई कदम उठाए हैं। इसके तहत मतदान केन्द्रों पर केवल मतदातओं को ही 100 मीटर के दायरे में जाने की इजाजत होगी। मतदान केन्द्रों के पास व्यवस्था बनाए रखने और अनुचित प्रवेश को रोकने के लिए 100 मीटर की परिधि तय की जाएगी। केवल मतदाताओं को ही अंदर जाने की अनुमति होगी।
उन्होंने कहा कि बूथ स्तरीय अधिकारी और अन्य सरकारी कर्मचारी इस सीमा के बाहर तैनात रहेंगे, जहां मतदाता दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा। प्रतिबंधित क्षेत्र के भीतर, अतिरिक्त जांच की व्यवस्था की जाएगी। इसके तहत मतदान केन्द्र में प्रवेश करने से पहले मतदाता दस्तावेजों का दो अलग-अलग स्थानों पर दोबारा सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। इस उपाय का उद्देश्य फर्जी मतदान को रोकना है। विचार यह है कि सत्यापन के कई स्तर हों ताकि केवल वास्तविक मतदाता ही अपना वोट डाल सकें। निर्वाचन आयोग ने मतदाता पर्ची वितरण के संबंध में भी निर्देश जारी किए हैं। मतदान कर्मियों को घर-घर जाकर पर्ची वितरित करने का निर्देश दिया गया है। पीठासीन अधिकारी उन मतदाताओं का रिकार्ड रखेंगे जिनसे संपर्क नहीं हो सका और इसके कारणों का भी उल्लेख करेंगे।
बहरहाल जो भी हो, बंगाल के चुनाव दिलचस्प हो चुके हैं। ये चुनाव बंगालियों की अस्मिता और भाजपा की शतरंजी चालों के बीच हो रहा है। बंगाल में अकेली तृणमूल कांग्रेस पिछले एक दशक से भाजपा का बंगाल प्रवेश रोके हुए है, वो भी अकेले। यूपीए घटक भी उसके साथ नही हैं। यहां तक कि कांग्रेस भी नहीं। मुझे लगता है कांग्रेस को अपने व्यवहार के लिए बाद में पछतावा होगा।


